World Space Week: पृथ्वी की सीमाओं से आगे सोचने का उत्सव

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह हमें याद दिलाता है कि अंतरिक्ष की खोज केवल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों का कार्य नहीं है। यह मानवता की साझा जिज्ञासा, ज्ञान और प्रगति की यात्रा है।

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गुरु चले जाते हैं… मगर उनकी कक्षाएं कभी खत्म नहीं होती

गुरु हमारे जीवन में केवल ज्ञान लेकर नहीं आता। वह हमारे देखने का ढंग बदलता है। वह हमारे भीतर कुछ ऐसे प्रश्न रख जाता है, जिनका उत्तर हमें वर्षों बाद मिलता है।

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ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है…

जीवन में भी यही होता है कि दो समान विचार वाले व्यक्ति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे क़रीब नहीं आते लेकिन फिर भी दोनों के मध्य एक संबंध स्थापित होता है।

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सरल,सहज है अस्तित्व के विज्ञान को समझना

अभी तक विज्ञान फंतासी साहित्य प्रो-एडवेंचर प्रवृत्ति के हुआ करते थे मगर भारतीय परिवेश की सौंधी सुगंध में पगी यह कृति अहिंसा के मौलिक और निरपेक्ष स्वाद की महत्ता को अप्रत्याशित रूप से प्रमाणित कर जाती है।

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एक के बाद एक पत्र आते हैं और परिवार डरता जाता है

न्यूजर्सी के सबर्ब वेस्टफील्ड की ऐसी ही एक शानदार विला 657 बुलावर्ड की ये कहानी अपने आप में इसलिए अलग है क्योंकि इसमें कोई भूत-प्रेत नहीं है।

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उदय प्रकाश की नई कहानी ‘कपटकाल में कवि’: एक टिप्पणी

उदय जी ने लिखा है यह कहानी का पहला ही ड्राफ्ट है। पहले ड्राफ्ट के इतने अधिक पाठ हो गए हैं कि शायद खुद उदय जी भी चकित होंगे।

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आवाज़ों के जुगनू: लफ़्ज़ों का ये दरिया अच्छा लगता है…

वे आवाजें जो रोज हमारे संग होती हैं, उनके पीछे की यात्रा को जानना बेहद दिलचस्प है। आवाज़ की दुनिया के सितारों की बातों में जीवन का फलसफा दिखाई देता है।

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खाली हुई जगह को जीवन से जोड़ने की कोशिश करती सीरीज

फिल्म बहुत हौले से बताती है कि जीवन में जब कुछ बुरा हो उससे भागने के बजाय उसका सामना किया जाना चाहिए। जिस दिन ये समझ लिया, उस दिन बहुत कुछ सुलझ सँवर जाता है।

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नए पत्तों की आहट से भी शाख़ें भीग जाती हैं…

एक लिहाज से यह शेर प्रकृति के ज़रिए परमात्मा तक भी पहुंचता है। इश्तियार के ज़रिए इंसान की रूह तक भी पहुंचता है और इशारों के ज़रिए क़ुदरत के इरादों तक भी पहुंचता है।

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अरे बदरा, ये बहक कर जाने का नहीं, झूम कर बरसने का मौसम है

बारिश की बूंदें हों और जीवन का संगीत जम जाएं फिर क्या कहने? इन दिनों बरसोंगे तो कोई शिकायत भी नहीं होगी कि क्यों बरस रहे हो?

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