दुनिया के तमाशे में फुर्सत खोजता हूं, आपके पास है क्या?

दिल अक्सर फुर्सत ढूंढ़ता है। किसी ऐसे को खोजता है जो जरा फुर्सत में हो। कोई ऐसा जिसके पास चांद देखने की फुर्सत हो। ऐसा जिसके पास यूं ही बेबात बतियाने का समय हो। जो यूं ही साथ चल पड़े कि फुर्सत में है उस वक्त। मगर फुर्सत है कि हमें मिलती नहीं है।

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लुभा लेता है झक सफेद और नाजुक टिश्यू पेपर

झक सफेद टिश्यू पेपर… ऐसा साफ कि बस देखते रहिए, पर यह भी सच है कि टिश्यू पेपर जब तक पैकट में रहता है तभी तक साफ रहता है।

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Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो

एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।

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अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया…

इस उपन्यास के प्रारंभ में ही यह नजर आने लगा कि लेखिका ज़िद की हद तक अपने पात्रों को कभी बोलने नहीं देती; वह खुद उनके भीतर बैठकर लगातार खुद ही बोलती रहती है।

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मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली

चे ग्‍वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्‍म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।

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अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय  

इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी का समाधि-लेख लिख दिया, वे राजनीति को स्थिर चित्र की तरह पढ़ रहे हैं।

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ठाकरे जी और दवे जी के कुनबे का रजनीश

राज्यसभा सीट पर बीजेपी ने तीन का चयन कैसे किया इस पर फिर कभी बात करेंगे। आज मैं यह बता सकता हूँ कि रजनीश अग्रवाल का चयन क्यों उपयुक्त है।

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मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला…

किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।

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कांग्रेस रामचंद्र गुहा से कहना तो चाहती होगी- यू टू ब्रूटस!

पत्रकार करण थापर को हाल ही में दी गई एक भेंटवार्ता में प्रसिद्ध इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक रामचंद्र गुहा ने राहुल गाँधी के बारे में अपने कांग्रेस विरोधी विचार फिर से व्यक्त किये।

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