यादों के गलियारों में खूशबुओं का फेरा 

आज से कई दशकों पहले मैनपुरी में साल में चार-चार मेले लगा करते थे ठाकुर जैत सिंह जी और ठाकुर माधव सिंह जी (माधौ) की जमींदारी में। जैतसिंह जी की बिटिया और माधव सिंह जी की बहना हमारी अम्मा मतलब दादी मां थी। समय बीतते के संग लोग भी वैकुंठ चले गए। पीछे जो रह गया वे हैं …

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स्‍वाद आस्‍वाद: गुजरात के ढोकलों से अलग है मालवा के ढोकले

मालवा के परिचय का एक चेहरा यहां की बोली की मिठास और आहार के स्‍वाद का है। मालवा का अपना खास स्‍वाद है। पड़ोसी राज्‍य गुजरात और राजस्‍थान का सिग्‍नेचर फूड भी मालवा में आ कर यहां का स्‍वाद पा कर इठला गया है।

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ये दोस्‍ती हम तोड़ेंगे…50 साल बाद अब क्‍या?

शोले फिल्‍म का गाना है, ये दोस्‍ती हम नहीं तोड़ेंगे… मगर एमपी की राजनीति के दो दोस्‍तों की दोस्‍ती 50 साल बाद टूटने जा रही है। हम बात कर रहे हैं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की। कमलनाथ के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने की अटकलों के बीच मीडिया ने सवाल किया तो दिग्विजय सिंह ने…

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सिर पर सवार समोसा

सभी फोटो: गिरीश शर्मा आज समोसे की कथा जानिये। समोसा जिसे कोई तिकोना कहता है, कोई चमोचा भी। तिकाने आकारा का यह दक्षिण एशिया का एक लोकप्रिय व्यंजन है। यह कचौरी और आलूबड़े की बिरादरी का समान रूप से चर्चित व लज़ीज़ है। त्रिभुजाकार व्यंजन को आटा या मैदा के साथ आलू के साथ बनाया…

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इश्‍क मेरा: जहां सफर ही मंजिल है

जब कभी मैं उदास होती हूं तो वह मुझे आवाज देती है-मानो कह रही हो, ‘चलो दोस्त लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं।’ मुझे उससे और उसे मुझसे गहरा इश्क है। उसके पहिये मेरे लिए पंख हैं। मैं उनके दम पर उड़ान भरती हूं।

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भारतेंदु का कहा 140 सालों बाद भी खरा

आधुनिक हिंदी साहित्‍य के पितामह कहे जाने वाले लेखक भारतेंदु हरिशचंद्र ने अपने देहांत से पहले नवंबर 1884 में बलिया के ददरी मेले में आर्य देशोपकारिणी सभा में एक भाषण दिया था। यह नवोदिता हरिश्‍चंद्र चंद्रिका में दिसंबर 1884 के अंक में छपा था। इस भाषण का विषय था-भारत वर्षोन्नति कैसे हो सकती है…

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गली-मोहल्‍ले में यूं मिल जाता है इनोवेशन

सरकारी सर्वे के दौरान महिलाओं से बात करने के लिए घर आंगन में कुछ देर बैठना हो जाता था। ऐसे ही सर्वे में एकबार सुवासरा के मीणा मोहल्ले में जाना यादगार अनुभव बन गया।

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कुमार गंधर्व: गायन का अद्भुत लोकतंत्र

8 अप्रैल 1924 को कर्नाटक बेलगांव के सुलेभावी गांव में जन्‍म लेने वाले शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकली को हम कुमार गंधर्व के नाम से जातने हैं। प्रशंसक उन्‍हें प्रेम और सम्‍मान से कुमार जी के नाम से संबोधित करते हैं। कवि सर्वेश्‍वरदयाल सक्‍सेना ने कुमार जी को गाते हुए प्रत्‍यक्ष देखा-सुना:

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Ameen Sayani Death: ख्‍वाबों सी आवाज, जादू सा असर

अमीन सयानी ने परंपरा से हट कर काम किया। भाइयो और बहनों सुनने के आदी समाज में बहनों और भाइयों कह कर महिलाओं को सम्‍मान देने की शुरुआत की।

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