जो मैं कहना चाह रहा था, वह खुद न कहकर उनसे कहलवा लिया
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जो मैं कहना चाह रहा था, वह खुद न कहकर उनसे कहलवा लिया जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जो मैं कहना चाह रहा था, वह खुद न कहकर उनसे कहलवा लिया जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जिसे ‘खूनी सोंडवा’ कहते हैं, मुझे वहीं मिला सबसे ज्यादा आनंद जारी >
ट्रंप बार-बार युद्ध रोकने, बातचीत और समझौते की भाषा बोलते हैं; लेकिन उसी के साथ वे सैन्य जमावड़े, कठोर अल्टीमेटम, धमकियों और बड़े हमलों की संभावना को भी बढ़ाते हैं।
क्या अमेरिकी साम्राज्यवाद आत्म-हत्या की दिशा में नहीं बढ़ रहा है! जारी >
मुझे उनकी बात कुछ जम नहीं रही है। मैं काफी विचलित हो गया। ऐसा क्यों किया गया है? क्या महेश जी की खुद की यह सोच और निर्णय था या उन पर दबाव डालकर थोपा गया?
मैं विचलित हूं, मुझे बताए बिना महेश जी ने ऐसा क्यों किया? जारी >
हम बस में बैठ गए।अचानक बच्चे हमारे पास सकुचाते हुए आए। जैसे आँसू गिरने को हों। मैंने उसे गले लगा लिया। नहीं बेटे, हम आएंगे, यहीं रहेंगे।
काेई खेत नहीं गया, कोई बाजार, कोई स्कूल, राे कर बोले, बाबा मत जाओ जारी >
इतने कम समय में इतनी बड़ी सफलता! सहसा विश्वास नहीं हो रहा है। मुझे ध्यान नहीं आता कि किसी ने आज तक धर्म का नाम लिए बिना अनजाने व्यक्ति के रूप में जाकर ऐसी सफलता पाई हो।
ऐसा लगा जैसे दुनिया जीत ली, सिर्फ तीन दिन बाद जबर्दस्त मुँह की खाई जारी >
नदी ही वह स्थान है, जहाँ अकेले में हम दोनों विचार-विमर्श कर पाते हैं और अपनी कार्य-योजना तैयार करते हैं। महेश जी बहुत अधिक उद्वेलित और चिंतित हैं।
बाबा, मैं ठीक होना चाहता हूँ… बाबागिरी मेरा पीछा नहीं छोड़ रही जारी >
इतना सुंदर दृश्य है कि तबियत खुश हो गई। बस पानी की सुंदरता है और उसी में पक्षी भी हैं। सूर्योदय हुआ, पानी में से निकलता हुआ सूरज, बस देखते ही बनता है।
बुढ़े ने रहने बुला लिया, हम सामान लिए चले आए, रात में बोला, घर से निकलो जारी >
लफ़्ज़ी मआनी पर ग़ौर करें तो यह शेर नाउम्मीदी में उम्मीद जगाने की बात करते हुए कहता है कि हर आशा निराशा में ही मौजूद होती है।
रात को तब्दील होते रोशनी में देखिए… जारी >
सामने खेतों में कुछ दूर पर बड़ी भीड़भाड़ दिखी, पाण्डे रोकता रहा वहाँ मत जाओ, गंदा है, जाने लायक नहीं है। महेश जी और मैं उसी तरफ चल दिए।
नाते-रिश्तेदार ‘माता-पूजन’ कर मनाते हैं ईंद, हैं न अनाेखी बात जारी >