स्वामी अवधेशानंद बाेले, विभूति जी आप अवश्य आइए, मुझे प्रतीक्षा रहेगी
अवधेशानंद जी ने धर्म काे सेवा कर्म से जोड़ते हुए यही कहा कि पूजा-अर्चना वास्तव में धर्म नहीं है, वरन् मनुष्य की सेवा ही वास्तविक धर्म है
स्वामी अवधेशानंद बाेले, विभूति जी आप अवश्य आइए, मुझे प्रतीक्षा रहेगी जारी >









