मेरे अहसासों का इकबाल मैदान, जम्हूरियत और शाहीन जिसकी शान
मेरे लिए यह सिर्फ एक मैदान नहीं है। इसी मैदान ने यह अहसास कराया कि कोई सावर्जनिक स्थल सत्ता से सवाल पूछने और सबको इंसाफ मिले, बराबरी का दर्जा मिले, इसकी खोज के मंच भी हो सकते हैं।
मेरे अहसासों का इकबाल मैदान, जम्हूरियत और शाहीन जिसकी शान जारी >










