आप इतने अच्छे आदमी हैं, कैसे लोगों के बीच फँस गए?
यहाँ यह चर्चा का विषय है कि एक अजूबा शहरी इंसान आया है जो डरता बिल्कुल नहीं है, यहाँ तक कि रात में दरवाजे खुले रखकर अकेला अंधेरे में सोता है।
आप इतने अच्छे आदमी हैं, कैसे लोगों के बीच फँस गए? जारी >
यहाँ यह चर्चा का विषय है कि एक अजूबा शहरी इंसान आया है जो डरता बिल्कुल नहीं है, यहाँ तक कि रात में दरवाजे खुले रखकर अकेला अंधेरे में सोता है।
आप इतने अच्छे आदमी हैं, कैसे लोगों के बीच फँस गए? जारी >
मैंने कहा ठीक है, स्वामी जी अगर चाहते हैं तो मैं रुक जाता हूँ। स्वामी जी ने कहा यह तो बहुत अच्छा होगा और शाम को भोजन के बाद मिलने का तय करके सब बाहर निकल आए।
स्वामी अवधेशानन्द ने कहा− मैं चाहता हूं कि आप… जारी >
अजीब निराशा से भरा वातावरण है। मैंने जैसा सोचा था, कट्ठीवाड़ा के शुरूआती अनुभव अभी तक उससे ठीक उलट ही हैं।
मरेंगे और मारेंगे, नहीं तो जिंदगी किस काम की! कानून की पढ़ाई दांव पर जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जो मैं कहना चाह रहा था, वह खुद न कहकर उनसे कहलवा लिया जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जिसे ‘खूनी सोंडवा’ कहते हैं, मुझे वहीं मिला सबसे ज्यादा आनंद जारी >
ट्रंप बार-बार युद्ध रोकने, बातचीत और समझौते की भाषा बोलते हैं; लेकिन उसी के साथ वे सैन्य जमावड़े, कठोर अल्टीमेटम, धमकियों और बड़े हमलों की संभावना को भी बढ़ाते हैं।
क्या अमेरिकी साम्राज्यवाद आत्म-हत्या की दिशा में नहीं बढ़ रहा है! जारी >
मुझे उनकी बात कुछ जम नहीं रही है। मैं काफी विचलित हो गया। ऐसा क्यों किया गया है? क्या महेश जी की खुद की यह सोच और निर्णय था या उन पर दबाव डालकर थोपा गया?
मैं विचलित हूं, मुझे बताए बिना महेश जी ने ऐसा क्यों किया? जारी >
हम बस में बैठ गए।अचानक बच्चे हमारे पास सकुचाते हुए आए। जैसे आँसू गिरने को हों। मैंने उसे गले लगा लिया। नहीं बेटे, हम आएंगे, यहीं रहेंगे।
काेई खेत नहीं गया, कोई बाजार, कोई स्कूल, राे कर बोले, बाबा मत जाओ जारी >
इतने कम समय में इतनी बड़ी सफलता! सहसा विश्वास नहीं हो रहा है। मुझे ध्यान नहीं आता कि किसी ने आज तक धर्म का नाम लिए बिना अनजाने व्यक्ति के रूप में जाकर ऐसी सफलता पाई हो।
ऐसा लगा जैसे दुनिया जीत ली, सिर्फ तीन दिन बाद जबर्दस्त मुँह की खाई जारी >
नदी ही वह स्थान है, जहाँ अकेले में हम दोनों विचार-विमर्श कर पाते हैं और अपनी कार्य-योजना तैयार करते हैं। महेश जी बहुत अधिक उद्वेलित और चिंतित हैं।
बाबा, मैं ठीक होना चाहता हूँ… बाबागिरी मेरा पीछा नहीं छोड़ रही जारी >