टर्निंग पाइंट आ ही गया, नारे लगे− बाबा, हम तुम्हारे साथ हैं…
मैं अंततः अब जीवन के अपने संभवतः सबसे रचनात्मक काल में प्रवेश कर रहा हूँ। देखते हैं, कितना क्या संभव हो पाता है!
टर्निंग पाइंट आ ही गया, नारे लगे− बाबा, हम तुम्हारे साथ हैं… जारी >
मैं अंततः अब जीवन के अपने संभवतः सबसे रचनात्मक काल में प्रवेश कर रहा हूँ। देखते हैं, कितना क्या संभव हो पाता है!
टर्निंग पाइंट आ ही गया, नारे लगे− बाबा, हम तुम्हारे साथ हैं… जारी >
लगता है एक “लक्ष्यहीन यात्रा” पर निकल पड़े व्यक्ति को लक्ष्य निर्धारित किये बिना ही सुखमय – सार्थक मनुष्य-जीवन जीने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो गया।
एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार जारी >
एक वर्ष यानी 365 दिन। अंत और आरंभ का एक वर्ष; विध्वंस और पुनर्निर्माण का एक वर्ष; मृत्यु और पुनरुत्थान का एक वर्ष!
एक साल की यात्रा−सार…स्वाभाविकता ही वास्तविक जीवन जारी >
यहाँ यह चर्चा का विषय है कि एक अजूबा शहरी इंसान आया है जो डरता बिल्कुल नहीं है, यहाँ तक कि रात में दरवाजे खुले रखकर अकेला अंधेरे में सोता है।
आप इतने अच्छे आदमी हैं, कैसे लोगों के बीच फँस गए? जारी >
मैंने कहा ठीक है, स्वामी जी अगर चाहते हैं तो मैं रुक जाता हूँ। स्वामी जी ने कहा यह तो बहुत अच्छा होगा और शाम को भोजन के बाद मिलने का तय करके सब बाहर निकल आए।
स्वामी अवधेशानन्द ने कहा− मैं चाहता हूं कि आप… जारी >
अजीब निराशा से भरा वातावरण है। मैंने जैसा सोचा था, कट्ठीवाड़ा के शुरूआती अनुभव अभी तक उससे ठीक उलट ही हैं।
मरेंगे और मारेंगे, नहीं तो जिंदगी किस काम की! कानून की पढ़ाई दांव पर जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जो मैं कहना चाह रहा था, वह खुद न कहकर उनसे कहलवा लिया जारी >
पिछला एक हफ्ता भगोरियामय रहा। झाबुआ जिले के अलग-अलग क्षेत्र का भगोरिया देखा और उसमें सांस्कृतिक विविधता देखी।
जिसे ‘खूनी सोंडवा’ कहते हैं, मुझे वहीं मिला सबसे ज्यादा आनंद जारी >
ट्रंप बार-बार युद्ध रोकने, बातचीत और समझौते की भाषा बोलते हैं; लेकिन उसी के साथ वे सैन्य जमावड़े, कठोर अल्टीमेटम, धमकियों और बड़े हमलों की संभावना को भी बढ़ाते हैं।
क्या अमेरिकी साम्राज्यवाद आत्म-हत्या की दिशा में नहीं बढ़ रहा है! जारी >
मुझे उनकी बात कुछ जम नहीं रही है। मैं काफी विचलित हो गया। ऐसा क्यों किया गया है? क्या महेश जी की खुद की यह सोच और निर्णय था या उन पर दबाव डालकर थोपा गया?
मैं विचलित हूं, मुझे बताए बिना महेश जी ने ऐसा क्यों किया? जारी >