सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं?
कई लोग इस दोराहे पर खड़े हैं कि अपनी किताब छापें या नहीं? असमंजस भी बड़ा है, कौन पढ़ेगा, कौन छापेगा, कैसे छपेगी किताब।
सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं? जारी >
कई लोग इस दोराहे पर खड़े हैं कि अपनी किताब छापें या नहीं? असमंजस भी बड़ा है, कौन पढ़ेगा, कौन छापेगा, कैसे छपेगी किताब।
सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं? जारी >
शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा सकता। आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक समावेशन और संस्थागत विश्वसनीयता भी शांति के अनिवार्य तत्व हैं।
बिना गोलियों का युद्ध और वैश्विक शांति की तलाश जारी >
सत्तर के दशक में नीरज को लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। वे पहले गीतकार थे जिनके भजन को फिल्म फेयर अवार्ड मिला था।
कानपुर में एक लड़का है, उसे जरूर बुला लें… जारी >
जीवन हमेशा अपने भीतर के हौसलों और इच्छाशक्ति के बल पर ही जिया जाता है। जो लोग किसी के सहारे जिंदगी गुज़ारते हैं वे कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।
मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा… जारी >
मैं गुरुजी के रचना संसार में खोया था। तभी एक सवाल से मेरी तंद्रा टूटी। उप्पल सर ने मुझसे पूछा कि क्या आप कभी गुरुजी से मिले हैं?
गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्वान की आक्रामकता जारी >
इस पुस्तक को पढ़कर महसूस होता है कि इंसानी भावनाओं और बातचीत का डायनामिक्स हमारी ज़िंदगी में बहुत कुछ मायने रखता है।
शब्दों के ऑर्केस्ट्रा में साइंस एक म्यूजिकल स्ट्रिंग जारी >
पहली बार जब उसको गले लगाया था तो उसकी और से मुझे उत्तर मिला था। लेकिन अब नहीं। पेड़ का शरीर तो खड़ा था लेकिन उसके प्राण निकल गए थे।
मां की याद हरी है,पेड़ सूख गया है… जारी >
विषपायी जी ने कबीर की तरह जीवन जिया। उनके पत्र और साहित्य लेखन का इतना प्रभाव रहा है कि उनके निधन पर प्रख्यात कहानीकार-संपादक राजेद्र यादव ने ‘हंस’ के संपादकीय के एक कालम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
एक थे विषपायी जी…ऐसे कुछ लोग ही मिले जारी >
यहां एक पहेली भी नज़र आती है जो बारिश के हर्फ़ को उल्टाने की बात कह रही है। बारिश लफ्ज़ जिन तीन हर्फ़ों से मिलकर बना है। उन्हें अगर उल्टा दिया जाए तो वह शराब लफ्ज़ के हर्फ़ों में तब्दील हो जाता है।
बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया… जारी >
यह कहा जा सकता है कि सांगीतिक डोमेन में राग की छवि का रूपांतरण का कीमिया एक गणितीय प्रक्रिया है जो एक जटिल सिग्नल को उसके मूल आवृत्ति घटकों में विभाजित करता है।
जिन्हें सुन अभंग याद आता है, जोहार माय बाप,जोहार माय बाप जारी >