मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली
चे ग्वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।
मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली जारी >
चे ग्वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।
मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली जारी >
यह मंडप हमें बताता है कि घर कोई स्थायी पता नहीं है। घर वो तड़प है जो पता मिट जाने के बाद भी बची रहती है।
वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है… जारी >
आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहते। वह केवल एक फल नहीं बल्कि एक इमोशन हो चुका है।
पुलिस आम! ये कैसा नाम है? जारी >
देखा जाए तो, बुढ़ापा सिर्फ बंद होते दरवाजों और खिडकियों का नाम नहीं, बल्कि एक नए नजरिए के खुलने का भी संकेत है।
बुढ़ापे की गरिमा को कायम रखने के लिए ख्याल तो बढ़िया है… जारी >
श्री महाकालेश्वर के दर्शन हेतु शारीरिक एवं मानसिक मजबूती दोनों जरूरी है क्योंकि ये वही देव हैं जो अपने ही शादी में रानी मैनावती की परिक्षा लेने में भी पीछे नहीं रहे।
उज्जैन में पग-पग पर बाबा महाकाल की महिमा का दर्शन जारी >
मैं गुरुजी के रचना संसार में खोया था। तभी एक सवाल से मेरी तंद्रा टूटी। उप्पल सर ने मुझसे पूछा कि क्या आप कभी गुरुजी से मिले हैं?
गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्वान की आक्रामकता जारी >
विषपायी जी ने कबीर की तरह जीवन जिया। उनके पत्र और साहित्य लेखन का इतना प्रभाव रहा है कि उनके निधन पर प्रख्यात कहानीकार-संपादक राजेद्र यादव ने ‘हंस’ के संपादकीय के एक कालम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
एक थे विषपायी जी…ऐसे कुछ लोग ही मिले जारी >
कभी-कभी यात्राएँ हमें कहीं नहीं ले जातीं, बल्कि हमें वहाँ लौटा लाती हैं, जहां हम सच में “संबद्ध” होते हैं।
सड़क अब बनेगी, रास्ते तो पहले ही बन गए जारी >
हम गुरुदत्त को उनकी फिल्मों से जानते हैं। ‘प्यासा’, ‘साहब, बीबी और गुलाम’, ‘कागज के फूल’ ‘चौदहवीं का चांद’, ‘बाजी’ जैसी फिल्में उनका परिचय हैं। इन फिल्मों के गीतों, ट्रीटमेंट और पर्दे पर उभरी श्रेष्ठता आज भी फिल्म प्रेमियों को हतप्रभ करती है।
सौ साल के गुरुदत्त: क्या 500 रुपए के फेर में गई जान जारी >
मेरा कहने का अर्थ है कि क्या आपका संस्थान लोगों को नौकरी देते वक्त या आप अपनी टीम चुनते वक्त यह ध्यान में रखते हैं कि उसमें समाज के सभी तबकों-जातियों और वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व हो सके?
एक कवि की उपस्थिति में उगता है नववर्ष का पहला सूर्य! जारी >