जीवनरंग

अनाम पथ का पथिक: आत्ममंथन और सरोकारों की यात्रा

अनाम पथ का पथिक केवल एक यात्रा वृतांत नहीं है बल्कि यह पुस्तक यात्रा के अर्थ पर विचार करने का निमंत्रण देती है। किसी भी रास्ते की दूरी या मार्ग में आने वाली कठिनाई से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस रास्ते ने किसी यात्री के भीतर क्या बदला। पुस्तक हमें बताती है कि किसी यात्रा की वास्तविक उपलब्धि अपने जीवन और समाज को एक नई दृष्टि से देख पाना भी है।

अनाम पथ का पथिक: आत्ममंथन और सरोकारों की यात्रा जारी >

अरे बदरा, ये बहक कर जाने का नहीं, झूम कर बरसने का मौसम है

बारिश की बूंदें हों और जीवन का संगीत जम जाएं फिर क्या कहने? इन दिनों बरसोंगे तो कोई शिकायत भी नहीं होगी कि क्यों बरस रहे हो?

अरे बदरा, ये बहक कर जाने का नहीं, झूम कर बरसने का मौसम है जारी >

मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली

चे ग्‍वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्‍म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।

मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली जारी >

वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है…

यह मंडप हमें बताता है कि घर कोई स्थायी पता नहीं है। घर वो तड़प है जो पता मिट जाने के बाद भी बची रहती है।

वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है… जारी >

बुढ़ापे की गरिमा को कायम रखने के लिए ख्याल तो बढ़िया है…

देखा जाए तो, बुढ़ापा सिर्फ बंद होते दरवाजों और खिडकियों का नाम नहीं, बल्कि एक नए नजरिए के खुलने का भी संकेत है।

बुढ़ापे की गरिमा को कायम रखने के लिए ख्याल तो बढ़िया है… जारी >

उज्‍जैन में पग-पग पर बाबा महाकाल की महिमा का दर्शन

श्री महाकालेश्वर के दर्शन हेतु शारीरिक एवं मानसिक मजबूती दोनों जरूरी है क्योंकि ये वही देव हैं जो अपने ही शादी में रानी मैनावती की परिक्षा लेने में भी पीछे नहीं रहे।

उज्‍जैन में पग-पग पर बाबा महाकाल की महिमा का दर्शन जारी >

गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्‍वान की आक्रामकता

मैं गुरुजी के रचना संसार में खोया था। तभी एक सवाल से मेरी तंद्रा टूटी। उप्‍पल सर ने मुझसे पूछा कि क्‍या आप कभी गुरुजी से मिले हैं?

गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्‍वान की आक्रामकता जारी >

एक थे विषपायी जी…ऐसे कुछ लोग ही मिले

विषपायी जी ने कबीर की तरह जीवन जिया। उनके पत्र और साहित्‍य लेखन का इतना प्रभाव रहा है कि उनके निधन पर प्रख्‍यात कहानीकार-संपादक राजेद्र यादव ने ‘हंस’ के संपादकीय के एक कालम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

एक थे विषपायी जी…ऐसे कुछ लोग ही मिले जारी >