अनाम पथ का पथिक: आत्ममंथन और सरोकारों की यात्रा
अनाम पथ का पथिक केवल एक यात्रा वृतांत नहीं है बल्कि यह पुस्तक यात्रा के अर्थ पर विचार करने का निमंत्रण देती है। किसी भी रास्ते की दूरी या मार्ग में आने वाली कठिनाई से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस रास्ते ने किसी यात्री के भीतर क्या बदला। पुस्तक हमें बताती है कि किसी यात्रा की वास्तविक उपलब्धि अपने जीवन और समाज को एक नई दृष्टि से देख पाना भी है।
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