कलारंग

Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो

एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।

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अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया…

इस उपन्यास के प्रारंभ में ही यह नजर आने लगा कि लेखिका ज़िद की हद तक अपने पात्रों को कभी बोलने नहीं देती; वह खुद उनके भीतर बैठकर लगातार खुद ही बोलती रहती है।

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मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला…

किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।

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बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना

अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-

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बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने  

पद्मश्री बशीर बद्र को देखकर इस बात का इत्‍मीनान हुआ कि आज भी हिंदुस्तान में उर्दू की एक अजीम हस्ती मौजूद है। हालांकि मुलाकात एक तरफा ही थी। डॉ. साहब अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे। 

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कविता की क्यारियों के बीच मोहब्बत का दरिया और इंसानियत का जल

कवि की चिंता इस समाज में हो रहे परिवर्तन, आम आदमी के प्रति बढ़ती जा रही उपेक्षा से है। रतन चौहान अपनी कविताओं में कठपुतलियों में बदलते समाज के प्रति चिंतित हैं।

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विहान की ‘खोंगचट’: परस्परता से दमका रंगकर्म का क्षितिज

मणिपुरी भाषा में ‘खोंगचट’ का मतलब होता है ‘यात्रा’ या ‘मोर्चा/रैली’। यह नाटक एक तोते ‘मिजाओ’ की जीवन यात्रा की लोककथा पर बुना गया था। ‘स्वप्नयान’ की यह प्रस्तुति वास्तव में विहान और उसके रंगकर्म की ‘खोंगचट’ है।

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अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें…

यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।

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वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है…

इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।

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