कलारंग

अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें…

यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।

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वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है…

इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।

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रात को तब्दील होते रोशनी में देखिए…

लफ़्ज़ी मआनी पर ग़ौर करें तो यह शेर नाउम्मीदी में उम्मीद जगाने की बात करते हुए कहता है कि हर आशा निराशा में ही मौजूद होती है।

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सुनो लड़कियो,बाज़ के गुण सीखो

सुंदर, असुंदर में/ भी मत उलझो। दुनिया भर में/ सम्मान पाने वाली/ महिलायें निरी सामान्य रही हैं चेहरे से/ गढ़ो व्यक्तित्व। सशक्तिकरण माँगती क्यूँ हो?

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‘ना’ कहने का साहस: पौराणिक नायिका सुकन्‍या आज की हेति

‘हेति’ महज एक कथा नहीं है। यह पौराणिक कथा के आगे एक विमर्श का आधार खड़ा करती है। कहानी खत्म हो जाती है पर इसके सवालों की गूंज देर तक पाठक के मन-मतिष्‍क में ठहरी रहती है।

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निगाहे-मस्त ने ठुकरा दिया ज़माने को…

इस शेर को अगर तसव्वुफ़ के रंग में रंगा हुआ समझा जाए तो यह एक नए ज़ाविए की तरफ़ ले जाता है। यहां सुबु, जाम , ख़ुम और मयखाना इश्तियारे की तरह इस्तेमाल किए गए हैं।

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जो जितने ज्‍यादा दिन ‘ठहरेगा’, उतना ज्‍यादा बिल देना पड़ेगा

श्री महाकालेश्वर के दर्शन हेतु शारीरिक एवं मानसिक मजबूती दोनों जरूरी है क्योंकि ये वही देव हैं जो अपने ही शादी में रानी मैनावती की परिक्षा लेने में भी पीछे नहीं रहे।

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मात खा रहे शिव ने कुछ ऐसा किया कि स्‍तब्‍ध रह गई पार्वती

शिव ने कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिसका औचित्य उस काम से ही न ठहराया जा सके। आदमी की जानकारी में वह इस तरह के अकेले प्राणी हैं जिनके काम का औचित्य अपने-आप में था।

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