राजरंग

सबरंग

मनरंग

मनरंग

एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार

लगता है एक “लक्ष्यहीन यात्रा” पर निकल पड़े व्यक्ति को लक्ष्य निर्धारित किये बिना ही सुखमय – सार्थक मनुष्य-जीवन जीने…

जीवनरंग

ज्ञानरंग

ज्ञानरंग

जो इच्छा से बंधा हुआ नहीं है,वह मुक्त है,जो स्वतंत्र है वही निर्भय है…

जीवन में संतुलन का नाम शून्यता है,संतुलन बिन्दु ही निर्भयता का केन्द्र है,यही निर्भय बनाता है,यहीं ऊर्जा लहर का उच्चतम…

बालरंग

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