एक दूजे के लिए: एक खूबसूरत मौसम की याद

‘एक दूजे के लिए’ उस ज़माने की फ़िल्म थी जब प्रेम होते ही प्रेमीजन बिस्तर पर कूद नहीं जाते थे। प्रेम का मतलब तब रोमांस ही होता था,’लव मेकिंग’ नहीं। कुछ झिझक बाक़ी थी। उदारीकरण आठ दस साल और दूर था।

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पॉजीटिविटी के फेर में खो न जाएं ‘वो 70 मिनट’

सत्तर मिनट। सिर्फ सत्तर मिनट हैं तुम्हारे पास। शायद, तुम्हारी ज़िन्दगी के सबसे ख़ास सत्तर मिनट। आज तुम अच्छा खेलो या बुरा, ये सत्तर मिनट तुम्हें ज़िन्दगी भर याद रहेंगे। तो कैसे खेलना है, आज मैं तुम्हें नहीं बताऊंगा…

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बेटे, प्रॉमिस करते हैं, हम न टूटेंगे, न रोएंगे

महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ आईएएस दंपति मिलिंद और मनीषा म्हैसकर के इकलौते बेटे मन्मथ ने जुलाई 2017 में मुंबई की एक हाइराइज इमारत की 20 वीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली थी। मन्मथ 18 साल का था और पुणे के एक कॉलेज में पहले साल में पढ़ रहा था। बेटे के इस अप्रत्याशित कदम से क्षुब्ध अभागे…

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