बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने  

अशोक मनवानी

साहित्‍यकार एवं रंगकर्मी

शायरी को आम इंसान की भाषा बनाने के हामी ख्यात शायर पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र आमारे बीच नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में गुरुवार को भोपाल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बशीर साहब की सादगी को कोमल स्वभाव उनकी शायरी की भी खासियत थी। ऐसी सादगी और मखमली अंदाज़ कि सुनने वाला लाजवाब हो उठता था। पद्म श्री डॉ. बशीर बद्र साहब के 89 वें जन्म दिवस पर उनके निवास पर पहुंचे साहित्यकार-रंगकर्मी अशोक मनवानी ने फरवरी 2024 में हुई इस मुलाकात को शब्दों में उकेरा था। उन्होंने लिखा कि जब मुलाकात हुई तो क्‍या ही मुलाकात हुई। स्‍वयं बद्र साहब के शब्‍दों में कहें तो ‘वो चेहरा किताबी रहा सामने, बड़ी खूबसूरत पढ़ाई हुई…’ यहां पढ़ाई को मुलाकात कहने का मन कर रहा है। आज बशीर बद्र साहब को विदा के मौके पर उस मुलाकात की बात-

डॉ. बद्र साहब के कुछ यादगार शेर 

कंटेंट सहयोग: सिद्दीक अहमद खां

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