संवेदना, साथ और साहस: दो ट्रांस वुमन की प्रेम कथा

  • डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

‘गांधी है तो भारत है’ के लेखक और राजनीति शास्‍त्र के प्राध्‍यापक

प्यार की न तो हदें होती है और न ही सरहदें…। प्यार तो बस प्यार है, बेहद कोमल और मधुर एहसास लिए यह आता है और दे जाता है सब कुछ। जयपुर की कर्णिका और प्रयागराज की शमा की कहानी भी कमाल की है। कर्णिका देश की पहली ट्रांसजेंडर है जो ब्रांड एम्बेसेडर है तथा वाल पेंटिंग की नामचीन कलाकार होकर भारत का प्रतिनिधित्व करने दुनिया भर की यात्राएँ करती है। वहीं उनकी हमसफर शमा, कर्णिका की सफलताओं का जश्न मनाने के लिए स्वादिष्ट भोजन की दावत देती है। अद्भुत है इन दो ट्रांस वुमन की प्रेम कथा…. ।

बेहद सच्चा और बिना शर्त का प्यार बीते दौर के किस्से और कहानियों में ही मिलते है, हकीकत की जिंदगी में प्रेम और दौलत की मजबूती भावनाओं और आकांक्षाओं को धूल में उड़ा कर रिश्तों को ओझल कर देती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है की प्यार जिंदा नहीं है। जयपुर की कर्णिका और प्रयाग की शमा कहने को ट्रांसवूमन है पर उनके प्यार की गहराई समन्दर से कम नहीं…।

प्यार एक ऐसी भावना है जो किसी भी लैंगिक पहचान से परे होती है। ट्रांस वुमन के बीच प्यार और संबंधों में वो सभी भावनाएं, सजीवता और समझ होती हैं जो अन्य किसी रिश्ते में होती हैं। ट्रांस वुमन एक-दूसरे के संघर्षों,पहचान और अनूठे अनुभवों को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं और समर्थन कर सकती हैं। समाज से भेदभाव,पहचान का संघर्ष और आत्मस्वीकृति की यात्रा जैसे उनके पास साझा अनुभव होते हैं। कर्णिका और शमा इन दो ट्रांस वुमन के बीच प्यार एक बहुत ही गहरे और सुंदर भावनाओं को छूता है, यह ट्रांसजेंडर महिलाओं के बीच भावनात्मक और रोमांटिक संबंधों को दर्शाता है। कहते है प्यार ख्वाबों में हो सकता है तो फेसबुक पर क्यों नहीं…। कर्णिका और शमा फेसबुक पर ही मिले..फिर एक बार शमा ने कर्णिका को फोन किया तो शमा के अंदाज ने कर्णिका को ऐसा प्रभावित किया कि दोनों एक दूजे के हो गए। यह रिश्ता ऐसा है जहां भावनात्मक संबंध के साथ-साथ पारस्परिक सम्मान और समझ भी अहम है। प्यार एक ऐसी शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति को मजबूत बना सकती है और ट्रांस वुमन के बीच यह और भी खास होता है,क्योंकि यह उस यात्रा का हिस्सा है, जहां वे अपनी असली पहचान को पूरी तरह से आत्मसात करती हैं।

कर्णिका अक्सर शमा से मिलने प्रयाग जाने लगी। कर्णिका के सिर से बालपन में ही पिता का साया उठ चूका था। एक मध्यवर्गीय परिवार में रहकर उसके लिए अपनी नैसर्गिक पहचान के साथ जीना आसान नहीं था। लेकिन ढाल उसकी मां बनी। फिर एक दिन ट्रेन में शमा से मिलाते हुए कर्णिका ने अपनी मां से कहा, यही मेरी हमसफर है।

समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समर्थन और समानता की कमी होने के कारण, ट्रांस वुमन के बीच प्यार और रिश्तों को लेकर विशेष संवेदनशीलता और समझ की आवश्यकता होती है। इसलिए इस तरह के रिश्ते न केवल भावनात्मक बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि वे समानता, स्वीकृति और मानवाधिकारों के लिए एक मजबूत बयान हो सकते हैं। जब दो ट्रांस वुमन एक-दूसरे से प्यार करती हैं, तो उनकी अपनी पहचान की समझ और सम्मान के कारण वे अधिक सच्चे और ईमानदार हो सकती हैं। वे अपने व्यक्तिगत संघर्षों और अनुभवों को साझा करने में अधिक सहज हो सकती हैं क्योंकि वे समझती हैं कि यह एक जटिल यात्रा है और एक-दूसरे के प्रति गहरी सहानुभूति और समर्थन होता है।

जिंदगी भी कमाल होती है, कुछ लोग जिंदगी को पहचान देने के लिए सब कुछ झोंक देते है तो कुछ लोग अपनी नैसर्गिक पहचान को ही जिंदगी समझ लेते है, उसे स्वीकार करते है और फिर निकल पड़ते है उस बियाबान सफर पर जिसका कोई ठौर नहीं होता। लेकिन उन्हें ठंडी हवा के झोंकों के बीच आनंद भी मिलता है और वे अपनी मदहोशी में खूब जीते है। ट्रांसजेंडर की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही होती है। जन्म से शुरू होने वाली चुनौतियां कभी खत्म नहीं होती। उनका जज्बा जिंदगी को जीता भी है, जहर भी पीता है लेकिन वे उस दुनिया में सब कुछ भूल जाते है जहां सिर्फ वे और उनका हम सफर होता है,ऐसा हम सफर जो भावनाओं को समझता है, शानदार अनुभूति देता है और रिश्तों में मिठास घोलता है।

कर्णिका और शमा कहने के लिए दोनों ट्रांस वुमन है लेकिन जिंदगी के प्रति नजरिया बेहद लाजवाब है। 27 साल की कर्णिका वॉल पेंटिंग की नामचीन कलाकार है जिनकी कला मुस्कुराने पर मजबूर कर देती है। भारत ही नहीं बल्कि इटली के वेनिस शहर की दीवारों पर भी उनकी पेंटिंग नजर आती है। भारत की ओर से वे वेनिस में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनी और अपनी कला से सबकों मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी साथी शमा जयपुर में शेफ है और वह कर्णिका के लिए बड़े प्यार से खाना बनाती है। शमा के लिए उसका परिवार अब सिर्फ कर्णिका है क्योंकि बाकि रिश्तें पहचान के मोहताज हो गए है।

कर्णिका कहती है कि हम अपना घर बनायेंगे,खूब जिएंगे और खूब घूमेंगे जिससे दोनों ज्यादा से ज्यादा साथ वक्त बिता सके। कर्णिका के भाई का नन्हा बच्चा, उसे बा कहकर बुलाता है। बा का अर्थ गुजराती में माँ होता है, बस उसके मन में यह टीस अवश्य है की काश,मैं सचमुच में मां बन पाती। हां, लेकिन जिंदगी के सफर में उनके पास पुष्पा माई का सहारा है, जो जीने की ख्वाइशें देती है और उम्मीदें भी जगाती है।

ट्रांसजेंडर और ट्रांस वुमन में क्‍या अंतर

ट्रांसजेंडर और ट्रांससेक्‍शुअल (Transsexual) को हिंदी में किन्‍नर कहते हैं। ट्रांसजेंडर शब्‍द का उपयोग हम ‘लिंग की एक पहचान’ के रूप में करते हैं। यानी वो जो जन्‍म से ही न पुरुष हैं और न ही महिला। जबकि ट्रांससेक्‍शुअल का अर्थ स्‍वयं को जन्‍म से विपरीत लिंग का घोषित करना हे। ऐसे लोगों जिन्‍होंने जन्‍म भले ही पुरुष या महिला के रूप में लिया है, लेकिन वो अपनी पहचान इससे उलट महसूस करते हैं। यानी यदि पैदा पुरुष के तौर पर हुए हो लेकिन खुद महिला महसूस करते हैं। या महिला के तौर पर जन्‍म लिया जो लेकिन बाद में स्वयं को पुरुष मानते हों। इन्‍हें ट्रांस वुमन या ट्रांस मेन कहा जाता है। एक तथ्‍य और है कि सभी ट्रांसजेंडर को हम ट्रांससेक्‍शुअल नहीं कह सकते लेकिन सभी ट्रांससेक्‍शुअल ट्रांसजेंडर में आते हैं।

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