मणि मोहन: खींंचे दृश्‍य और लिखे शब्‍द झरते हैं मन पर

राजधानी भोपाल के पास एक कस्‍बा है, गंजबासौदा। उस कस्‍बे में एक कवि रहता है, मणि मोहन, जिसे दुनिया ने पहले ‘कस्‍बे का कवि’ कह कर संबोधित किया। ‘दुर्दिनों की बारिश में रंग’ दिखला रहा ‘कस्‍बे का कवि’ इनदिनों ‘पतझर का संगीत’ बुन चुका है। (तीनों के अलावा ‘शायद’, ‘भेड़ियो ने कहा शुभरात्रि’ कवि, फोटोग्राफर, प्रोफसर मणि मोहन के काव्‍य संग्रह हैं।) वे प्रकृति और परिवेश को जिन साधारण शब्दों से विशिष्‍ट भाव रूप में उकेर देते हैं उतनी ही दक्षता से कैमरे के जरिए फोटो पर उतार देते हैं। वे एक तरफ रूह को छूती कविताएं रच रहे हैं, खलील जिब्रान, रोमानियाई कवि मारिन सोरेसक्यू और तुर्की कवियत्री मुइसेर येनियाकी आदि की कविताओं का हिन्दी अनुवाद कर विश्‍व कविता से हमें रूबरू करवा रहे हैं तो फोटो के जरिए प्रकृति से हमारा नाता जरा अधिक गहरा कर रहे हैं। कवि‍ताओं की भांति उनके चित्र भी पहली नजर में सहज दिखते हैं और ठहर कर देखो तो कई अर्थों के साथ खुलते हैं।

आइए, आज मणि मोहन जी की दृष्टि से अपनी दुनिया को देखें और समझें।

अपनी कविताओं में मणि मोहन कुछ यूं व्‍यक्‍त होते हैं:

महीनों इंतजार किया
जिस बारिश का
जब वह आई
तो भीगने से मना कर दिया सबने
बारिश के खिलाफ
सड़कों पर निकल आये
छाते और रेनकोट
पानी से बचने के लिए
दुकानों के अहातों
और दरख़्तों के नीचे
ठिठक कर खड़े हो गए
मिट्टी के लोग।

/पानी/

जितनी जरूरत थी
दरख़्तों ने
उतना ही लिया पानी
परिंदों ने भी प्यार से
उतना ही पिया पानी
किसी ने नहीं तोड़ा भरोसा
धरती और आसमान का
सिवा हमारे …

आपने फोटोग्राफ में वे इस तरह प्रकृति को हमारे सामने खोलते हैं:

2 thoughts on “मणि मोहन: खींंचे दृश्‍य और लिखे शब्‍द झरते हैं मन पर”

  1. शशि तिवारी

    इतनी सुंदर तस्वीरें हैं कि इन्हें बार बार देखते रहा जाए

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