आईनों रूह का चेहरा भी दिखा दो उनको…
सूरत को देखकर किसी की सीरत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। मगर सवाल यह है कि इस असली सीरत को बताए कौन?
आईनों रूह का चेहरा भी दिखा दो उनको… जारी >
सूरत को देखकर किसी की सीरत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। मगर सवाल यह है कि इस असली सीरत को बताए कौन?
आईनों रूह का चेहरा भी दिखा दो उनको… जारी >
कई लोग इस दोराहे पर खड़े हैं कि अपनी किताब छापें या नहीं? असमंजस भी बड़ा है, कौन पढ़ेगा, कौन छापेगा, कैसे छपेगी किताब।
सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं? जारी >
सत्तर के दशक में नीरज को लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। वे पहले गीतकार थे जिनके भजन को फिल्म फेयर अवार्ड मिला था।
कानपुर में एक लड़का है, उसे जरूर बुला लें… जारी >
जीवन हमेशा अपने भीतर के हौसलों और इच्छाशक्ति के बल पर ही जिया जाता है। जो लोग किसी के सहारे जिंदगी गुज़ारते हैं वे कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।
मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा… जारी >
इस पुस्तक को पढ़कर महसूस होता है कि इंसानी भावनाओं और बातचीत का डायनामिक्स हमारी ज़िंदगी में बहुत कुछ मायने रखता है।
शब्दों के ऑर्केस्ट्रा में साइंस एक म्यूजिकल स्ट्रिंग जारी >
यहां एक पहेली भी नज़र आती है जो बारिश के हर्फ़ को उल्टाने की बात कह रही है। बारिश लफ्ज़ जिन तीन हर्फ़ों से मिलकर बना है। उन्हें अगर उल्टा दिया जाए तो वह शराब लफ्ज़ के हर्फ़ों में तब्दील हो जाता है।
बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया… जारी >
यह कहा जा सकता है कि सांगीतिक डोमेन में राग की छवि का रूपांतरण का कीमिया एक गणितीय प्रक्रिया है जो एक जटिल सिग्नल को उसके मूल आवृत्ति घटकों में विभाजित करता है।
जिन्हें सुन अभंग याद आता है, जोहार माय बाप,जोहार माय बाप जारी >
लियो एक बहुत सामान्य इंसान है। पिता का विराट व्यक्तित्व उसे ढँके रहा जब वह उनसे दूर जाता है तब सही गलत को निष्पक्ष देख पाता है।
बिना चीख चिल्लाहट, हौले से दर्द और भावनाओं को उकेरती फिल्म जारी >
एलिस को यह जानते डर लगता है लेकिन पति को बताने पर वह इसे बहुत हल्के में लेते हैं। डॉक्टर से मिलते हुए भी वह जिस उग्रता से इसके लक्षणों को नकारते हैं।
… अंत में जो बच जाता है वह आँखें भिगो देता है जारी >
जैसे ही दो उंगलियां उठीं, वे उठी ही रह गईं। इसके बाद क्या बोलना है, कुछ याद नहीं आया। घबराहट इतनी थी कि न तो कुछ याद आ रहा था और न ही उंगली नीचे हो रही थी।
जब कवि की उंगली तिलोत्तमा के सामने रुकी रह गई जारी >