हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे…
यह जीवन दर्शन से जुड़ा शेर है। जो हमारे भीतर होता है उसे हम देख नहीं पाते और जो सामने दिखता है उसे सही समझ कर ज़िन्दगी भर तड़पते रहते हैं।
हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे… जारी >
यह जीवन दर्शन से जुड़ा शेर है। जो हमारे भीतर होता है उसे हम देख नहीं पाते और जो सामने दिखता है उसे सही समझ कर ज़िन्दगी भर तड़पते रहते हैं।
हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे… जारी >
सितार को समर्पित यशस्वी कला गुरू उस्ताद सिराज खान के मेवाती स्कूल ऑफ सितार के वार्षिक प्रतिष्ठा आयोजन पर हंसध्वनि। यह संगीत समारोह ऐसे पवित्र विचार की अनुभूति दे गया,जिसे उपलब्धि ही कहना उचित होगा।
कॉस्मिक ऑर्केस्ट्रा और मेवाती घराने का संगीत जारी >
इंसान को अपनी दिनचर्या जागने की तरफ तो ले आती है लेकिन जागने के बाद एक इंसान ऐसा कुछ नहीं कर पाता कि वह ज़िंदा भी महसूस हो।
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता… जारी >
‘कुछ दस्तकें, कुछ दस्तख़त’ के केनवस पर उड़ान के पंख की कलम से लिखे गए चमकीले सुवर्ण हर्फ-हर्फ इस तरह महसूस किए जा सकते हैं जैसे ब्रेल लिपि के पाठक करते हैं।
ताकि संगीत-संस्कृति से हमारा रिश्ता पहले जैसा जरूर हो जारी >
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा- जीवन से बड़ी कोई किताब नहीं, मगर इसे अपनी रोशन नजर से पढ़ना…
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा… जारी >
हर ऊंचाई पर पहुंचकर महसूस होता है कि यह वह ऊंचाई नहीं है जिसकी तमन्ना रही है। तो फिर वहां कैसे पहुंचा जा सकता है?
एक ही घूंट में दीवाने जहां तक पहुंचे… जारी >
ये कविताएं प्रेम के होने का उत्सव है। ‘होना’ यानी अस्तित्व। अपने अस्तित्व को पहचान से उपजी अभिव्यक्ति।
‘रास्ते पर चलना’ जीवन में भटक जाने का पर्याय था… जारी >
अजय सोडानी का नवीनतम यात्रा वृतांत “एक था जाँस्कर: सुवरण खुदैया चिऊँटो का देश” वस्तुतः एक ऐसी त्रासदी की गाथा है, जिस त्रासदी से बचा जा सकता था।
एक था जाँस्कर: भारत की प्राचीनतम बसाहट की अनूठी गाथा जारी >
चारों एपिसोड एक अपराध से जुड़े अलग अलग आयामों पर केंद्रित हैं जिनमें इंवेस्टिगेशन के दौरान कुछ बेहद भावुक और सुकूनदायक सीन आते हैं जो शीतल हवा के झोंकों सा अहसास देते हैं।
किशोरों के माता-पिता के लिए जरूर देखने वाली सीरीज जारी >
सारी दुनिया को अपनी मुट्ठी में क़ैद समझ कर चलने वाला तो अभी ख़ुद को भी नहीं जानता है। वह कौन है, उसकी ताक़त क्या है?
ठहरो-ठहरो मुझे अपनी तो ख़बर होने दो… जारी >