आज ऑफिस में लगेगा ताला, नाम पट्टिका हट जाएगी
जो मेरी पहचान बन गई थी-जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे यानी वकालत, वह छूट गई। आज ऑफिस में ताला लगकर नाम पट्टिका हट जाएगी वहाँ से।
आज ऑफिस में लगेगा ताला, नाम पट्टिका हट जाएगी जारी >
जो मेरी पहचान बन गई थी-जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे यानी वकालत, वह छूट गई। आज ऑफिस में ताला लगकर नाम पट्टिका हट जाएगी वहाँ से।
आज ऑफिस में लगेगा ताला, नाम पट्टिका हट जाएगी जारी >
शराबी है इसलिए भगत जी उससे बात नहीं करते, फिर भी शराबी भाई का प्रेम देखने लायक है। सब कुछ इतना सरल और नैसर्गिक है कि अनायास ही श्रद्धा होने लगती है।
चोम सिंह ने समझा दिया, 21 वीं सदी में अपनी शर्तों पर जिया जा सकता है जारी >
आज के दिन का मेरे जीवन में बड़ा महत्व है। सफलता के साथ मेरे पारिवारिक जीवन में एक नया मोड़ आया था। आज से ही व्यक्तिगत त्रासदी के बीज अंकुरित हुए थे।
उस दिन मैं अचानक छोटा-मोटा ‘महामानव’ बन गया… मगर जारी >
मुझे पूरे समय यह अहसास था कि जो मैं कर रहा हूं, मैं उसके लिए नहीं बना हूं। वकालत का पेशा एक संवेदनशील व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है।
वकालत छोड़ी, फिर अपनाई, मैं उलझता चला जा रहा था… जारी >
लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।
भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा… जारी >
लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।
खबर फैल गई कि मैं ‘बैरागी’ हूं, इनाम नहीं मिलेगा जारी >
सब कुछ छोड़ देने की संकल्पना के बावजूद ऐसा बहुत कुछ हम सबके पास होता है, जो कभी भी छूटता नहीं। शायद यही अपनापन और जुड़ाव हमें हमेशा जीवंत भी बनाए रखता है।
अपने गांव भंवरताल में हूं; एक वो दिवाली थी, एक ये दिवाली है, एकदम अलग जारी >
झाबुआ से धार आते हुए मैं सोच रहा था कि लगातार विरोधाभासी रहवासी परिस्थितियों में रह पाना कितना सार्थक हो पाएगा। जब तक आगे के कार्य की स्पष्टता तक यह चलाया जा सकता है।
पूरे पच्चीस साल बाद पैदल अपने गांव भंवरताल जा रहा हूं… जारी >
मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।
दहेज का दबाव न हो तो हर मर्द चार-पांच ब्याह कर लेगा जारी >
मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।
संभवतः किसी को उम्मीद नहीं होगी कि मैं इस तरह फट पडूंगा… जारी >