
- कविता वर्मा
लेखक साहित्यकार हैं।
नेटफ्लिक्स पर फिल्म: The Materialist
लोग शादी क्यों करते हैं? क्योंकि लोग उनसे कहते हैं कि करना चाहिए और क्योंकि लोग अकेले होते हैं और इसलिए भी क्योंकि उनके अन्दर उम्मीद होती है कि वे अपने पेरेंट्स से अलग तरह से जियेंगे। लेकिन आज शादियाँ असफल क्यों हो रही हैं? लोग अपना मनपसंद पार्टनर ढूंढते हैं। उसे ढूँढने में बरसों लगा देते हैं फिर भी वे असंतुष्ट क्यों हैं? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके कोई जवाब किसी के पास नहीं हैं फिर भी लोग शादी कर रहे हैं। अपनी जिंदगी के युवावस्था के बेहतरीन साल एक अच्छे जीवनसाथी की खोज में उसके मिलने के इंतजार में खर्च कर रहे हैं। वे उन्हें मिलते हैं, देर सवेर ही सही, मिलते हैं, उसके बाद क्या?
इस सवाल का जवाब कुछ हद तक आपको मिलेगा इस फिल्म में। फिल्म की कहानी शुरू होती हैं एक आदिम स्त्री से जो इंतजार कर रही है पुरुष का। पुरुष जो उसके लिए शिकार करके खाना लाने गया है और जब वह आता है, एक दूसरे को देखकर उन दोनों की आँखों और चेहरे पर जो चमक आती है, वही इस फिल्म का सार है। इसके लिए पूरी फिल्म घूँट-घूँट पीते हुए देखना चाहिए। उस आदिम काल में जब सुख-सुविधाएं नहीं थीं जीवन का मतलब पेट और शरीर की भूख थी, जिसे पूरा करते हुए एक स्त्री और एक पुरुष एक-दूसरे को प्रेम करते थे। एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी बिता देते थे।
द मटेरियलिस्ट (The Materialist) सीलिंग सोंग द्वारा लिखित और निर्देशित लगभग दो घंटे की इस फिल्म को देखते हुए दर्शकों के मन में बहुत सारे प्रश्न उठते हैं, कई दबे पड़े प्रश्नों के जवाब मिलते हैं और यदि वह संवेदनशील हुआ तो अपने रिश्ते को बेहतर और नई नज़र से देख पाता है। फिल्म में मुख्य भूमिका डकोटा जॉनसन (लूसी), क्रिस इवांस (जॉन), पेद्रो पास्कल (हेरी), जो विंटर्स (सोफी) मरीन इर्लेंड (वोइलेट) की है। फिल्म हिंदी में डब है और बहुत सहजता से आगे बढती है।
फिल्म उस आदिम काल से आज के समय में आती है जहाँ डकोटा जॉनसन एक मैच मेकर है जो एक कंपनी में काम करती है। उसके क्लाइंट उस पर भरोसा करते हैं। उसके सामने अपने दिल की बात खुलकर बताते हैं ताकि वह उनके लिए एक परफेक्ट मैच ढूंढ सके। वह मैच ढूंढती है। उनकी मीटिंग (डेट) तय करती है। उस मीटिंग का फीड बैक लेती है, फिर मीटिंग तय करती है। ये सिलसिला चलता रहता है जब तक कि वे दो लोग शादी करने को तैयार नहीं हो जाते या एक दूसरे को नापसंद करके किसी और बेहतर की तलाश के लिए डकोटा यानी लूसी को नहीं कहते। कंपनी के साथ क्लाइंट बने रहते हैं, मोटी फीस देते रहते हैं और उसकी और उस जैसी कई मैच मेकर की सफलता का पैमाना, तय होने वाली शादियों की संख्या या क्लाइंट के साथ बने रहने से तय होता है। इस मायने में लूसी एक सफल मैच मेकर है। वह अपने क्लाइंट का विश्वास जीतती है। बहुत धैर्य से उनकी बात सुनती है। वह अपने काम को इन्वेस्टमेंट बिजनेस कहती है और बेहद खूबसूरती से अपनी बात रखते हुए किसी शादी पार्टी में अपने लिए क्लाइंट जुटाती है।
ऐसी ही एक पार्टी में वह मिलती है एक अमीर आदमी हैरी (पेद्रो पास्कल) से, जो उसकी कई क्लाइंट के लिए अच्छा मैच हो सकता है लेकिन वह लूसी का पार्टनर बनना चाहता है। एक बेहद अमीर आदमी जो उसे महंगे रेस्तरां में ले जाता है, महंगे गिफ्ट देता है और इसे वह अपने भविष्य के लिए इन्वेस्ट करना भी कहता है। लूसी भी उसकी अमीरी दरियादिली से प्रभावित होती है उसके साथ सम्बन्ध रखती है।
लूसी का एक एक्स है जॉन (क्रिस इवांस) जो अभी भी उसका दोस्त है। वह अपने एक्टिंग के शौक के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देता है। वह अच्छी नौकरी नहीं लेता क्योंकि फिर उसे नाटक की रिहर्सल के लिए समय नहीं मिलेगा। पैसों की तंगी के कारण वह शेयरिंग में रहता है। अपनी पुरानी गाड़ी को बहुत कम चलाता है लेकिन उसे बेचता नहीं है। वह लूसी को प्यार करता है लेकिन जानता है कि वह अच्छे जीवन की अधिकारी है इसलिए उसे अपनी जिंदगी से जाने देता है लेकिन एक दोस्त के रूप में हमेशा मौजूद रहता है।
तभी लूसी की एक क्लाइंट के साथ कुछ अजीब हादसा होता है जो उसे हिला देता है। वह भावनात्मक रूप से बेहद अकेली होती है लेकिन उसके अमीर बॉय फ्रेंड हैरी को इसका एहसास तक नहीं होता। इस समय लूसी का एक्स उसे भावनात्मक संबल देता है। इस समय लूसी मैच मेकर कंपनी की एम्प्लाई से आगे बढ़कर एक दोस्त की तरह अपनी उस क्लाइंट को सहारा देती है।
लूसी जो खुद को एक सफल मैचमेकर मानती है, जो अपनी क्लाइंट की हर जायज नाजायज मांगों को पूरा करने का आश्वासन देती है, वह इस घटना के बाद अचानक साक्षी भाव से चीज़ों को देखने लगती है। वह अपने काम के खोखलेपन को समझती है और अचानक ही खुद पर से अपना विश्वास खोने लगती है। ऐसे में उसे हैरी के साथ अपना रिश्ता भी बेमानी लगने लगता है।
फिल्म बहुत छोटी-छोटी घटनाओं और दृश्यों के साथ आगे बढती है। फिल्म के कुछ संवाद दर्शकों को झकझोरते हैं। वे अचानक से उन्हें एक ऐसे सत्य से साक्षात्कार करवाते हैं जो सामने है, लेकिन हम देखना नहीं चाहते हैं।
कुछ संवाद को बता देना शायद मेरी बात पूरी करे:
- सब बढ़िया है। बस, कोई ऐसी बात नहीं जो कमाल की हो।
- दो इंच से क्या फर्क पड़ता है? पड़ता है हाईट बढाने के लिए सर्जरी होती है। छह इंच तक बढ़ जाती है दो लाख लगते हैं।
- या तो अकेले मरूँगी या अमीर पति ढूंढ लूँगी। एक ही बात है।
- शादी भी एक बिजनेस डील की तरह है और ये तब से हो रहा है जबसे ये शुरू हुआ है।
- पीटर से शादी इसलिए करना चाहती हो क्योंकि वह तुम्हारी वेल्यू बढाता है। तुम्हें स्पेशल फील करवाता है।
- हम थेरेपिस्ट से बेहतर हैं। हम उनकी लाइफ के उस प्रायवेट हिस्से से जुड़ते हैं जो वे अपने थेरेपिस्ट से भी नहीं बताते और न ही बताना चाहते हैं, जैसे रिजेक्शन और लोनलीनेस। ये वो राज हैं जो वे किसी अजनबी को नहीं बताना चाहते लेकिन हमसे कहते हैं। हम वही लोग हैं जिन पर वे अपने थेरेपिस्ट से ज्यादा भरोसा करते हैं। हमारे साथ रिस्क लेते हैं।
- हमारा काम लोगों की जिंदगी बदलना है।
फिल्म का अंत आज के इस भौतिक युग में संबंधों के लिए आवश्यक ऊष्मा उर्जा के लिए प्रेम की आवश्यकता को स्थापित करता है।
मेरा दृष्टिकोण
आज शादी एक बहुत बड़ा बिजनेस बन चुकी है लेकिन इसकी सफलता की सम्भावना उतनी ही संदिग्ध होती जा रही है। शादी के लिए जिस तरह भौतिक सूची लंबी हो रही है उसके न मिलने से शादी और अपने पार्टनर के प्रति निराशा उतनी ही तीव्रता से बढ़ रही है। उम्र, रंग-रूप, कद, कमाई, नौकरी, घर, गाड़ी के साथ लंबी लिस्ट मैच मेकर को दी जाती है। शादी के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाना, कद बढ़वाने के लिए सर्जरी करवाना जैसी चीज़ें की जा रही हैं, लेकिन फिर भी शादियाँ असफल हो रही हैं।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि सबसे पहले शादी करते हुए स्त्री और पुरुष ने एक-दूसरे में क्या देखा होगा? उस समय जब न कोई सामाजिक बंधन थे न भौतिक वस्तुओं की चाह। उस समय क्यों कोई पुरुष किसी स्त्री के लिए मेहनत करता था या क्यों कोई स्त्री पूरी जिंदगी एक पुरुष के साथ बिता देती थी? कब और कैसे शादी सिर्फ दो इंसानों की भावनात्मक शारीरिक आवश्यकता से आगे बढ़कर इच्छाओं की लंबी फेहरिस्त हो गई? जब ये फेहरिस्त पूरी पा ली जाती है तब नई चाहना या असंतोष की फेहरिस्त तैयार हो जाती। लेकिन इंसान के लिए जरूरी क्या है? गाड़ी, बंगला, बैंक बेलेंस या एक दूसरे का प्यार, सम्मान, और आपसी समझ? एक बड़े घर में अकेले होना ठीक है या एक छोटे घर में अपने साथी के साथ?
फिल्म के वे संवाद जो लूसी कहती है:
- एक दिन बिना किसी खास वजह के तुम दोनों एक दूसरे से नफरत करने लगोगे। किसी तरह बच्चे तो हो जाएंगे लेकिन एक-दूसरे से ऊब जाओगे। फिर कोई किसी को धोखा देगा फिर लड़ाई होगी।
- हाँ, ये होता है शादिया टूटती है और बिना किसी खास बड़े कारण के टूटती हैं लेकिन फिर भी।
- मैं उन लोगों का सपना देख रही हूँ जिन्होंने सबसे पहले शादी की थी। शिकार करने और घूमने के बीच उनमें प्यार हो गया। क्या एक जैसा था उनके बीच?
यही तो ढूंढना है और यही ढूँढने में मदद करती है फिल्म द मटेरियलिस्ट।

