बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना

अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-

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बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने  

पद्मश्री बशीर बद्र को देखकर इस बात का इत्‍मीनान हुआ कि आज भी हिंदुस्तान में उर्दू की एक अजीम हस्ती मौजूद है। हालांकि मुलाकात एक तरफा ही थी। डॉ. साहब अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे। 

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ज्ञान भी ज्ञानियों का पीछा करता है,उन्हें संरक्षण भी देता है…

सच्चा ज्ञान प्रकाश है और नीरव एकांत के बीहड़ में,अंधेरे में प्रकाश का स्पार्क खुरदुरे चकमक पत्थर की रगड़ से पैदा होता है। यहां खुरदुरेपन को दु:ख, असीम दुःख समझें।

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वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है…

यह मंडप हमें बताता है कि घर कोई स्थायी पता नहीं है। घर वो तड़प है जो पता मिट जाने के बाद भी बची रहती है।

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कविता की क्यारियों के बीच मोहब्बत का दरिया और इंसानियत का जल

कवि की चिंता इस समाज में हो रहे परिवर्तन, आम आदमी के प्रति बढ़ती जा रही उपेक्षा से है। रतन चौहान अपनी कविताओं में कठपुतलियों में बदलते समाज के प्रति चिंतित हैं।

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विहान की ‘खोंगचट’: परस्परता से दमका रंगकर्म का क्षितिज

मणिपुरी भाषा में ‘खोंगचट’ का मतलब होता है ‘यात्रा’ या ‘मोर्चा/रैली’। यह नाटक एक तोते ‘मिजाओ’ की जीवन यात्रा की लोककथा पर बुना गया था। ‘स्वप्नयान’ की यह प्रस्तुति वास्तव में विहान और उसके रंगकर्म की ‘खोंगचट’ है।

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कॉकरोच: अपमान के लिए उपयोग होने वाला शब्द नया राजनीतिक सत्य

कॉकरोच जनता पार्टी के गठन के साथ दिखाई दे रहे आलोड़न से इतना साफ है कि भारत का दमित राजनीतिक सत्य अपने नए ऐतिहासिक रूप को पाने के लिए आकुल-व्याकुल है।

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जो इच्छा से बंधा हुआ नहीं है,वह मुक्त है,जो स्वतंत्र है वही निर्भय है…

जीवन में संतुलन का नाम शून्यता है,संतुलन बिन्दु ही निर्भयता का केन्द्र है,यही निर्भय बनाता है,यहीं ऊर्जा लहर का उच्चतम शिखर है।

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अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें…

यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।

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