लुभा लेता है झक सफेद और नाजुक टिश्यू पेपर

झक सफेद टिश्यू पेपर… ऐसा साफ कि बस देखते रहिए, पर यह भी सच है कि टिश्यू पेपर जब तक पैकट में रहता है तभी तक साफ रहता है।

लुभा लेता है झक सफेद और नाजुक टिश्यू पेपर जारी >

Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो

एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।

Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो जारी >

अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया…

इस उपन्यास के प्रारंभ में ही यह नजर आने लगा कि लेखिका ज़िद की हद तक अपने पात्रों को कभी बोलने नहीं देती; वह खुद उनके भीतर बैठकर लगातार खुद ही बोलती रहती है।

अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया… जारी >

मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली

चे ग्‍वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्‍म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।

मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली जारी >

अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय  

इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी का समाधि-लेख लिख दिया, वे राजनीति को स्थिर चित्र की तरह पढ़ रहे हैं।

अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय   जारी >

ठाकरे जी और दवे जी के कुनबे का रजनीश

राज्यसभा सीट पर बीजेपी ने तीन का चयन कैसे किया इस पर फिर कभी बात करेंगे। आज मैं यह बता सकता हूँ कि रजनीश अग्रवाल का चयन क्यों उपयुक्त है।

ठाकरे जी और दवे जी के कुनबे का रजनीश जारी >

मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला…

किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।

मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >

कांग्रेस रामचंद्र गुहा से कहना तो चाहती होगी- यू टू ब्रूटस!

पत्रकार करण थापर को हाल ही में दी गई एक भेंटवार्ता में प्रसिद्ध इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक रामचंद्र गुहा ने राहुल गाँधी के बारे में अपने कांग्रेस विरोधी विचार फिर से व्यक्त किये।

कांग्रेस रामचंद्र गुहा से कहना तो चाहती होगी- यू टू ब्रूटस! जारी >

बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना

अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-

बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना जारी >