Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो
एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।
Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो जारी >
एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।
Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो जारी >
इस उपन्यास के प्रारंभ में ही यह नजर आने लगा कि लेखिका ज़िद की हद तक अपने पात्रों को कभी बोलने नहीं देती; वह खुद उनके भीतर बैठकर लगातार खुद ही बोलती रहती है।
अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया… जारी >
उदास धूप की शाख़ पर रात रखना ऐसा ही है, जैसे एक मुरझाए हुए पौधे को सूरज की सोहबत में या खुले वातावरण में रख दिया जाए।
उदास धूप की टहनी पे रात रख देना… जारी >
चे ग्वेरा ने भी बाइक यात्रा खत्म कर ली थी लेकिन अंदर जो यात्रा शुरू हुई थी वह तो अपने असली पडाव पर पहुंचनी बाकी थी।
मोटरसाइकिल यात्रा जिसके बाद एक डॉक्टर ने बंदूक उठा ली जारी >
इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी का समाधि-लेख लिख दिया, वे राजनीति को स्थिर चित्र की तरह पढ़ रहे हैं।
अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय जारी >
राज्यसभा सीट पर बीजेपी ने तीन का चयन कैसे किया इस पर फिर कभी बात करेंगे। आज मैं यह बता सकता हूँ कि रजनीश अग्रवाल का चयन क्यों उपयुक्त है।
ठाकरे जी और दवे जी के कुनबे का रजनीश जारी >
किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।
मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >
पत्रकार करण थापर को हाल ही में दी गई एक भेंटवार्ता में प्रसिद्ध इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक रामचंद्र गुहा ने राहुल गाँधी के बारे में अपने कांग्रेस विरोधी विचार फिर से व्यक्त किये।
कांग्रेस रामचंद्र गुहा से कहना तो चाहती होगी- यू टू ब्रूटस! जारी >
अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-
बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना जारी >
पद्मश्री बशीर बद्र को देखकर इस बात का इत्मीनान हुआ कि आज भी हिंदुस्तान में उर्दू की एक अजीम हस्ती मौजूद है। हालांकि मुलाकात एक तरफा ही थी। डॉ. साहब अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे।
बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने जारी >