मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता…
इंसान को अपनी दिनचर्या जागने की तरफ तो ले आती है लेकिन जागने के बाद एक इंसान ऐसा कुछ नहीं कर पाता कि वह ज़िंदा भी महसूस हो।
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता… जारी >
इंसान को अपनी दिनचर्या जागने की तरफ तो ले आती है लेकिन जागने के बाद एक इंसान ऐसा कुछ नहीं कर पाता कि वह ज़िंदा भी महसूस हो।
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता… जारी >
हर ऊंचाई पर पहुंचकर महसूस होता है कि यह वह ऊंचाई नहीं है जिसकी तमन्ना रही है। तो फिर वहां कैसे पहुंचा जा सकता है?
एक ही घूंट में दीवाने जहां तक पहुंचे… जारी >
चारों एपिसोड एक अपराध से जुड़े अलग अलग आयामों पर केंद्रित हैं जिनमें इंवेस्टिगेशन के दौरान कुछ बेहद भावुक और सुकूनदायक सीन आते हैं जो शीतल हवा के झोंकों सा अहसास देते हैं।
किशोरों के माता-पिता के लिए जरूर देखने वाली सीरीज जारी >
सारी दुनिया को अपनी मुट्ठी में क़ैद समझ कर चलने वाला तो अभी ख़ुद को भी नहीं जानता है। वह कौन है, उसकी ताक़त क्या है?
ठहरो-ठहरो मुझे अपनी तो ख़बर होने दो… जारी >
पारिवारिक रिश्तों के इतर हमारे आस-पास इतने प्यारे रिश्ते होते हैं और वे जीवन के नाजुक मोड़ पर कैसे आपको संभाल सकते हैं यह देखना सुखद है।
चीजों को होने देने के इंतजार का धैर्य और उन पर खामोश नजर जारी >
बाघ झाड़ी में छिपा होगा। उसकी आँखें चमक रही होगीं। उसकी गंध इसे भी आई होगी। इसने चाहा भी होगा कि टेडी उस ओर न जाए। लेकिन टेडी तो दौड़ पड़ा होगा! और फिर जो हुआ इसने अपनी आँखों से देखा होगा।
जैसे,पास तो होना चाहता है लेकिन जताना नहीं चाहता जारी >
आधुनिक हिंदी कवियों ने राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों के साथ यथार्थ को अपनी कविताओं में रेखांकित किया है। वहीं आशीष कुमार शर्मा ‘भारद’ की रचनाओं में हमें छायावाद की विशेषताओं की झलक मिलती है।
जो कुछ आया सम्मुख सब उपमान तुम्हारे नाम किए… जारी >
मंज़िल का मिलना उतना ख़ास नहीं है जितना ख़ास रास्तों की तकलीफ़ों का सामना करना और समझना।
सुना है कि मंज़िल क़रीब आ गई है… जारी >
इसे ज़िन्दगी की ज़रूरियात और इंसानी हक़ों के नज़रिए से समझना नए अर्थ खोलता है। सरपरस्त जब अपनी रिआया को नज़रंदाज़ कर देता है तो उसे कहीं सहारा नहीं मिलता है।
जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस को… जारी >
जो बंदा बंदगी के रंग में डूबता है वह दुनियादारों से कुछ इसीलिए अलग होता है क्योंकि वह अपने भीतर छुपे हुए राज़ को राज़ नहीं रहने देता। वह सब कुछ सामने लाने की हिम्मत करता है।
मंज़िल पर पहुंचने की चाह में रास्तों से गुज़रना भूल जाते हैं… जारी >