वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है…
यह मंडप हमें बताता है कि घर कोई स्थायी पता नहीं है। घर वो तड़प है जो पता मिट जाने के बाद भी बची रहती है।
वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है… जारी >
यह मंडप हमें बताता है कि घर कोई स्थायी पता नहीं है। घर वो तड़प है जो पता मिट जाने के बाद भी बची रहती है।
वेनिस पहुँचा भारत का वो दर्द जो हर उस इंसान का है जो घर से दूर है… जारी >
मणिपुरी भाषा में ‘खोंगचट’ का मतलब होता है ‘यात्रा’ या ‘मोर्चा/रैली’। यह नाटक एक तोते ‘मिजाओ’ की जीवन यात्रा की लोककथा पर बुना गया था। ‘स्वप्नयान’ की यह प्रस्तुति वास्तव में विहान और उसके रंगकर्म की ‘खोंगचट’ है।
विहान की ‘खोंगचट’: परस्परता से दमका रंगकर्म का क्षितिज जारी >
लफ़्ज़ी मआनी पर ग़ौर करें तो यह शेर नाउम्मीदी में उम्मीद जगाने की बात करते हुए कहता है कि हर आशा निराशा में ही मौजूद होती है।
रात को तब्दील होते रोशनी में देखिए… जारी >
करीब बीस-पच्चीस मिनिट की चढ़ाई के बाद झरने तक पहुंच गए। बेहद रमणीक स्थान है। मैं तो खड़ा देखता ही रह गया। यहां से हटने का मन ही नहीं कर रहा था।
मैंने अपना पूरा नाम बताया तो वे एकदम उछल पड़े… जारी >
आज तय किया है कि घोसलिया से काफी दूरी पर तीसरा बांध देखने जाएंगे जो इसी साल पूरा हुआ है और जिसमें पहली बार पानी भरा है।
नक्सलवाद के एक काल्पनिक बिजूके को प्रतीक बनाया गया जारी >
झाबुआ जिले में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर काफी समय से चल रहा है। मैं पहले कभी झाबुआ नहीं गया था इसलिए जाने की इच्छा तो है।
दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
भोपाल करीब आने लगा तो मैं ट्रेन में ऊपर चढ़कर बैठ गया… जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
जीवन में पहली बार रोजदारी की थी, वह भी भक्ति की! जारी >
‘हेति’ महज एक कथा नहीं है। यह पौराणिक कथा के आगे एक विमर्श का आधार खड़ा करती है। कहानी खत्म हो जाती है पर इसके सवालों की गूंज देर तक पाठक के मन-मतिष्क में ठहरी रहती है।
‘ना’ कहने का साहस: पौराणिक नायिका सुकन्या आज की हेति जारी >
शाम के पांच बजे होंगे। एकाएक दो मोटरसाइकलें आकर रूकीं और उसमें से चार लोग उतरे। मैं रामायण पढ़ता रहा पर मन में आया कि ये लोग अचानक यहां कैसे आ धमके?
वाह, पचास रुपए? बड़े दिनों बाद इतने रुपए एक साथ देखे थे… जारी >