art and culture

सिनेमाई क्रूरता के इस दौर में कला से ही उम्मीद: प्रो. गोहिल

भारतीय सिनेमा की यात्रा पर संवाद का आयोजन हुआ। इस अवसर पर दो सशक्त और समकालीन विषयों पर आधारित फिल्मों ‘प्यास’ और ‘ग्वावा– ए मॉब लिंचिंग’ का प्रदर्शन किया गया।

सिनेमाई क्रूरता के इस दौर में कला से ही उम्मीद: प्रो. गोहिल जारी >

सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं?

कई लोग इस दोराहे पर खड़े हैं कि अपनी किताब छापें या नहीं? असमंजस भी बड़ा है, कौन पढ़ेगा, कौन छापेगा, कैसे छपेगी किताब।

सुधा जैसा असमंजस सीधा-साधा, अपनी किताब छापें या नहीं? जारी >

कानपुर में एक लड़का है, उसे जरूर बुला लें…

सत्तर के दशक में नीरज को लगातार तीन बार फिल्‍म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। वे पहले गीतकार थे जिनके भजन को फिल्‍म फेयर अवार्ड मिला था।

कानपुर में एक लड़का है, उसे जरूर बुला लें… जारी >

मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा…

जीवन हमेशा अपने भीतर के हौसलों और इच्छाशक्ति के बल पर ही जिया जाता है। जो लोग किसी के सहारे जिंदगी गुज़ारते हैं वे कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।

मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा… जारी >

बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया…

यहां एक पहेली भी नज़र आती है जो बारिश के हर्फ़ को उल्टाने की बात कह रही है। बारिश लफ्ज़ जिन तीन हर्फ़ों से मिलकर बना है। उन्हें अगर उल्टा दिया जाए तो वह शराब लफ्ज़ के हर्फ़ों में तब्दील हो जाता है।

बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया… जारी >

बिना चीख चिल्लाहट, हौले से दर्द और भावनाओं को उकेरती फिल्‍म

लियो एक बहुत सामान्य इंसान है। पिता का विराट व्यक्तित्व उसे ढँके रहा जब वह उनसे दूर जाता है तब सही गलत को निष्पक्ष देख पाता है।

बिना चीख चिल्लाहट, हौले से दर्द और भावनाओं को उकेरती फिल्‍म जारी >

… अंत में जो बच जाता है वह आँखें भिगो देता है

एलिस को यह जानते डर लगता है लेकिन पति को बताने पर वह इसे बहुत हल्के में लेते हैं। डॉक्टर से मिलते हुए भी वह जिस उग्रता से इसके लक्षणों को नकारते हैं।

… अंत में जो बच जाता है वह आँखें भिगो देता है जारी >

जब कवि की उंगली तिलोत्तमा के सामने रुकी रह गई

जैसे ही दो उंगलियां उठीं, वे उठी ही रह गईं। इसके बाद क्या बोलना है, कुछ याद नहीं आया। घबराहट इतनी थी कि न तो कुछ याद आ रहा था और न ही उंगली नीचे हो रही थी।

जब कवि की उंगली तिलोत्तमा के सामने रुकी रह गई जारी >

जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो…

अगर अपनी मंज़िल तक पहुंचना है तो इस संजीदगी के साथ सफ़र तय किया जाए कि किसी को पता न चले और आपकी मंज़िल आपके कदमों में हो।

जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो… जारी >