ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है…
जीवन में भी यही होता है कि दो समान विचार वाले व्यक्ति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे क़रीब नहीं आते लेकिन फिर भी दोनों के मध्य एक संबंध स्थापित होता है।
ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है… जारी >
जीवन में भी यही होता है कि दो समान विचार वाले व्यक्ति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे क़रीब नहीं आते लेकिन फिर भी दोनों के मध्य एक संबंध स्थापित होता है।
ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है… जारी >
एक लिहाज से यह शेर प्रकृति के ज़रिए परमात्मा तक भी पहुंचता है। इश्तियार के ज़रिए इंसान की रूह तक भी पहुंचता है और इशारों के ज़रिए क़ुदरत के इरादों तक भी पहुंचता है।
नए पत्तों की आहट से भी शाख़ें भीग जाती हैं… जारी >
उदास धूप की शाख़ पर रात रखना ऐसा ही है, जैसे एक मुरझाए हुए पौधे को सूरज की सोहबत में या खुले वातावरण में रख दिया जाए।
उदास धूप की टहनी पे रात रख देना… जारी >
किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।
मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >
अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-
बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना जारी >
पद्मश्री बशीर बद्र को देखकर इस बात का इत्मीनान हुआ कि आज भी हिंदुस्तान में उर्दू की एक अजीम हस्ती मौजूद है। हालांकि मुलाकात एक तरफा ही थी। डॉ. साहब अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे।
बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने जारी >
कवि की चिंता इस समाज में हो रहे परिवर्तन, आम आदमी के प्रति बढ़ती जा रही उपेक्षा से है। रतन चौहान अपनी कविताओं में कठपुतलियों में बदलते समाज के प्रति चिंतित हैं।
कविता की क्यारियों के बीच मोहब्बत का दरिया और इंसानियत का जल जारी >
यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।
अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें… जारी >
इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।
वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है… जारी >
मैं गुरुजी के रचना संसार में खोया था। तभी एक सवाल से मेरी तंद्रा टूटी। उप्पल सर ने मुझसे पूछा कि क्या आप कभी गुरुजी से मिले हैं?
गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्वान की आक्रामकता जारी >