अनजान द्वारा खुद को समझे जाने से जीवन मनोहारी हो गया

  • विभूति झा, सामाजिक कार्यकर्ता

संपादन: चिन्‍मय मिश्र

विभूति झा से मेरा परिचय कुछ इस तरह का है कि वे पहले एक नामी वकील थे। अब आदिवासियों को साथ लेकर संघर्षरत हैं। ग्रामसभा को लेकर जनजागरण जैसा कुछ कर रहे हैं और उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। अभिन्न मित्र देवीलाल पाटीदार को मेरे द्वारा संपादित एक पुस्तक ‘नर्मदा घाटी से बहुजन गाथाएं’ का संपादकीय बहुत अच्छा लगा और उन्होंने विभूति दा को इन डायरियों के संपादन का कार्य मुझसे करने के लिए सुझाया। विभूति दा इन्दौर आए। बात हुई। मैंने स्वयं पर शंका करते हुए, कि क्या वह कार्य कर पाऊंगा? सहमति दे दी। उनकी डायरी “एक लक्ष्यहीन यात्रा” को लंबी कहानी में बदलना जोखिम भरा काम है। यह एक विलक्षण दस्तावेज है। यह एक ऐसी गाथा है जो बताती है कि सिर्फ महत्वाकांक्षा को छोड़ देना भर काफी नहीं होता। ऐसा तो तमाम लोग कर सकते हैं। विभूति दा महत्वाकांक्षा के त्याग से बहुत आगे जाते हैं और अपना स्वअर्जित यश भी समाज से विस्मृत करा देते हैं। समाज जब उनकी यश और कीर्ति को भी भूल चुका होता है, तब अपनी यात्रा के करीब पंद्रह बरस बाद, वे अपने इस कथोपकथन पर जमी धूल झाड़ते हैं और उसे सबके सामने लाने की कोशिश करते हैं। इस लंबी कहानी में एकाध जगह अनायास उस अर्जित यश का यशोगान सामने आता है तो वह बहुत कठोरता से उसे विलुप्त कर देते है।
यह असाधारण होते हुए भी एक साधारण दस्तावेज है। यह न तो कहानी है, न यात्रा वृतांत। यह एक व्यक्ति के “लौटने” की गाथा है।
इस पूरी गाथा में कुछ भी उपदेशात्मक नहीं है। यह नैतिकता का पाठ भी नहीं पढ़ाती। यह एक ऐसी रचना है, जो सिखाती है, कि बिना किसी को दुखी किए कैसे अपना जीवन जिया जा सकता है और उसे सकारात्मक बनाया जा सकता है। इस गाथा की सिर्फ एक विशिष्टता है कि यह सच कहती है। याद रखिए कीट्स ने कहा भी था, ’’जो सुन्दर है, वही सत्य है, जो सत्य है वही सुंदर हो सकता है। गांधी ने भी “सत्य ही ईश्वर है” कहा था। विभूति दा की यह डायरी अबूझ सी सच्ची कहानी है। यह सत्य की अभिव्यक्ति है।
– चिन्‍मय मिश्र

जारी…

2 thoughts on “अनजान द्वारा खुद को समझे जाने से जीवन मनोहारी हो गया”

  1. Interesting and intellectually stimulating.
    As the story ufolds, it makes the reader more curious…can’t wait to read the next part.

  2. Rajendra Sharma

    दादा प्रणाम, आगे पढ़ने की उत्सुकता है….🙏🏽

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