विश्व कविता दिवस 2025: 20 वीं सदी के महानतम कवियों में शुमार पाब्लो नेरूदा की कविता
हम हर साल 21 मार्च को विश्व कविता दिवस मनाते हैं। यह सुनकर जरा अजीब लगता है और सहज सवाल उठता है कि क्या कविता के लिए भी कोई एक दिन का उत्सव मनाया जाना चाहिए? असल में, यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने तय किया है कि ” काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भाषाई विविधता का समर्थन करने और लुप्तप्राय भाषाओं को सुनने के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से” कविता दिवस बनाया जाना चाहिए। जाहिर है, इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में कविता के पढ़ने, लिखने, छपने और शिक्षण को बढ़ावा देना है। यह “राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कविता आंदोलनों को नई पहचान और प्रोत्साहन देना” की पहल है। इस दिन को हम अपनी पसंदीदा कविता साझा कर यादगार बनाना चाहते हैं। इस क्रम में पढ़िए हमारे स्तंभकार आशीष दशोत्तर की पसंदीदा कविता :
20 वीं सदी के महानतम कवियों में शुमार पाब्लो नेरूदा सिर्फ एक कवि ही नहीं बल्कि राजनेता और कूटनीतिज्ञ भी थे। 1971 में नेरूदा को फ़्रांस में चिली का राजदूत नियुक्त किया गया। पाब्लो नेरूदा को 1971 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था, लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। सांस लिए बिना जैसे जीवित नहीं रहा जा सकता है उसी तरह लिखे बिना भी मैं जीवित नहीं रह सकता।
पहाड़ और नदी
मेरे देश में एक पहाड़ है
मेरे देश में एक नदी है
आओ मेरे साथ
रात पहाड़ तक चढ़ती है
भूख नदी तक उतरती है।
आओ मेरे साथ
वे कौन हैं जो सहते हैं, झेलते हैं?
नहीं जानता, लेकिन वे मेरे लोग हैं
आओ मेरे साथ
नहीं जानता, लेकिन वे मुझे पुकारते हैं
कहते हैं, “हम मुसीबतें झेल रहे हैं”
आओ मेरे साथ
वे मुझ से कहते हैं,
“तुम्हारे लोग
तुम्हारे अभागे लोग,
पहाड़ और नदी के दरमियान
भूख और विपत्ति से ग्रस्त ।
वे अकेले संघर्ष करना नहीं चाहते
वे तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं, दोस्त।”
ओह! तू जिसे मैं प्यार करता हूँ,
नन्हीं जान,गेहूँ के लाल दाने,
कठिन होगा संघर्ष
कठिन होगी जिंदगी,
लेकिन तू मेरे साथ आएगी।