दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना
झाबुआ जिले में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर काफी समय से चल रहा है। मैं पहले कभी झाबुआ नहीं गया था इसलिए जाने की इच्छा तो है।
दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना जारी >
झाबुआ जिले में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर काफी समय से चल रहा है। मैं पहले कभी झाबुआ नहीं गया था इसलिए जाने की इच्छा तो है।
दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
भोपाल करीब आने लगा तो मैं ट्रेन में ऊपर चढ़कर बैठ गया… जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
जीवन में पहली बार रोजदारी की थी, वह भी भक्ति की! जारी >
शाम के पांच बजे होंगे। एकाएक दो मोटरसाइकलें आकर रूकीं और उसमें से चार लोग उतरे। मैं रामायण पढ़ता रहा पर मन में आया कि ये लोग अचानक यहां कैसे आ धमके?
वाह, पचास रुपए? बड़े दिनों बाद इतने रुपए एक साथ देखे थे… जारी >
इस जगह आकर जेल जैसा लग रहा है, खुली जेल। याद आया आंदोलनों के दौरान जेल में बिताया गया वक्त। वहां भी ऐसा ही वातावरण और खाना मिलता था। वैसे तीन बार जेल गया हूं।
मैंने सोचा, खतरनाक होने के लिए खतरनाक होना जरूरी नहीं होता जारी >
जीवन में शायद पहली बार किसी से कुछ मांगा था। स्वयं को इस तरह सुनकर बहुत अच्छा लगा। दरअसल, इसका अर्थ हुआ कि मैंने अपने ‘दंभ’ पर पहली विजय प्राप्त की है।
उसने मेरे पैर छू कर कहा, बाबा, कहीं मत जाओ, तुम जैसे महात्मा की जरूरत है जारी >
मैं जिस उद्देश्य के साथ निकला था, कि नर्मदा जी पहुंचना है, उसके अप्रतिम जल को ओर बढ़ा। धीरे-धीरे पानी तक पहुंचा। जल का स्पर्श किया। नर्मदा जी में थोड़ा अंदर गया, वहां आचमन किया। कुछ देर वहीं खड़ा रहा।
भोजन करने और भोजन पाने के बीच का अंतर भी समझ आने लगा जारी >
इस पूरी गाथा में कुछ भी उपदेशात्मक नहीं है। यह नैतिकता का पाठ भी नहीं पढ़ाती। यह एक ऐसी रचना है, जो सिखाती है, कि बिना किसी को दुखी किए कैसे अपना जीवन जिया जा सकता है।
अनजान द्वारा खुद को समझे जाने से जीवन मनोहारी हो गया जारी >
हर जगह बस और बस खुशियों का रेला है। हंसते-गाते-नाचते लोगों का मेला है। रंग-अबीर-गुलालों का उड़ता बादल है तो सिर चढ़कर बोलते अबीर से बहका-बहका लोगों का मन है।
प्रकृति से मन तक हर तरफ फाग, इनमें आप कहां हैं? जारी >
भोपाल की यह विरासत को सरकार की नजरे इनायत दरकार है, क्योंकि यह शर्म की नहीं, गर्व की विरासत है, क्योंकि सबसे पहले यहीं ब्रिटिश यूनियन जैक को हटा कर तिरंगा फहराया गया था।
जहां से शुरु हुआ था संदेशों का सफर, जहां फहराया पहली बार तिरंगा जारी >