साल नया पर मन का क्या?
क्या हम अपने जीवन की पूरी दिशा बदल सकते हैं? या हम सिर्फ संकीर्ण, घटिया, अर्थहीन जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं? क्या हम यह सब छोड़ सकते हैं और एक साफ स्लेट के साथ नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं?”
क्या हम अपने जीवन की पूरी दिशा बदल सकते हैं? या हम सिर्फ संकीर्ण, घटिया, अर्थहीन जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं? क्या हम यह सब छोड़ सकते हैं और एक साफ स्लेट के साथ नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं?”
मधुबन कॉटेज केवल एक गंतव्य नहीं है; यह एक जीवनशैली है। इसने मुझे धीमा होना सिखाया है, छोटे-छोटे क्षणों का आनंद लेना सिखाया है, और सादगी में खुशी पाना सिखाया है, अपनी शाश्वत सुंदरता और शांत आकर्षण के साथ।
कवि, चित्रकार, किस्सागो, यायावर और प्रेमी इसे बारम्बार देखें जारी >
शारीरिक तौर पर दिमाग से दिल की भौतिक दूरी सिर्फ 18 इंच के करीब होती है पर उसे पूरा करने में अक्सर जिंदगी बीत जाया करती है।
जो डूबा सो पार…इब्तिदा में ही रेह गए सब यार जारी >
आबिदा के सूफी कलाम और पंडित जसराज के राग सुनती हूं तो पिता जीवंत हो जाते हैं। सब कलाकारों, सूफियों, अवधूतों से मेरी पहचान करवाने वाले वही थे।
उस दिन यह अहसास हुआ कि जाने वाला कहीं नहीं जाता जारी >
शरद ऋतु मानसून का विदाई गीत है। बारिश प्रकृति के शुद्धिकरण का त्यौहार है। उसके बाद कोई अदृश्य चितेरा बारिश में धुले, स्वच्छ आकाश के कैनवास पर हर कल्पनीय रंग बिखेर जाता है।
शरद है साल की पहली प्यारी मुस्कान जारी >
भीड़ समवेत स्वर में जोर से चिल्लाई-छोड़ दो….। दादा ने बिना सुलगा सुतलीबम फेंक दिया। लोग हंसने लगे।
दादा ने सुतली बम पकड़े रखा और जलती कंडी फेंक दी जारी >
जयेंद्रगंज, ढोली बुआ का पुल, इंदरगंज, हजीरा और मुरार में जैसे कोचिंग क्लासेस और गुरुजनों की बड़ी-छोटी दुकानें सज गईं। छात्र-छात्राओं का रेला दिन भर शहर की सड़कों पर भेड़ों की तरह भटकता रहता।
माह में एक फिल्म देखता लेकिन बैठता बालकनी में ही जारी >
मुझे – 1.5 का चश्मा चढ़ेगा। चश्मा बनवाया गया। पता चला जिस बिल्डिंग की छत पर पढ़ने वाली को मैं लड़की समझता था, वो दरअसल एक लड़का था।
छत पर पढ़ने वाली लड़की असल में लड़का निकली जारी >
मैं भ्रमित था। जो पर्चा मैंने रात को देखा था, हूबहू वही मेरे सामने था। मुझे विश्वास नहीं हुआ, कुछ देर तक मैं इसी भ्रम में रहा कि मैं ठीक से पढ़ नहीं पा रहा हूं।
मेरे होश उड़ गए, वही पेपर आया, जो कल मिला था जारी >
मेरे सामने पर्चा रखा गया, चाय और नाश्ता पेश किया गया और पांच जोड़ी आंखें मुझ पर केंद्रित हो गईं। मैंने किसी वकील की तरह, दस्तावेज पढ़ा, जो किसी एग्जाम के पर्चे की तरह नजर आता था और साइक्लोस्टाइलड था। उन प्रश्नों के जवाब खोजने में मुझे भी 3-4 घंटे लगे।
परीक्षा की पहली रात मुझे सोना था लेकिन घर आते-आते 2 बज गए जारी >