सिनेमाई क्रूरता के इस दौर में कला से ही उम्मीद: प्रो. गोहिल

1 thought on “सिनेमाई क्रूरता के इस दौर में कला से ही उम्मीद: प्रो. गोहिल”

  1. विवेक कुमार मिश्र

    सिनेमा और समानांतर सिनेमा पर बहुत ही व्यवस्थित ढ़ंग से यहां बातचीत रखी गई है। सिनेमा हमारे समय व समाज की उन सच्चाइयों को दिखाता है जो लोगों की आंखों से ओझल थी पर उन पर फोकस सिनेमा में आने के बाद पड़ता है।

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