
- कविता वर्मा
लेखक साहित्यकार हैं।
नेटफ्लिक्स पर फिल्म: The Watcher
कैसा हो जब कोई शहर की भागदौड़ से दूर सबर्ब में एक खूबसूरत विला खरीदे। उसमें रहने के जीवन को शांति सुकून से जीने के सपने संजोये उस घर में शिफ्ट हो और उस परिवार को एक पत्र मिले। न परिवार के नाम नहीं बल्कि उस शानदार विला के नाम पत्र मिले जिसमें उस विला को संबोधित करते हुए लिखा हो कि तुम बहुत खूबसूरत हो और मैं सदियों से तुम्हें देखता आ रहा हूँ।
सोचिये अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या आप उस घर में रहेंगे? न्यूजर्सी के सबर्ब वेस्टफील्ड की ऐसी ही एक शानदार विला 657 बुलावर्ड की ये कहानी अपने आप में इसलिए अलग है क्योंकि इसमें कोई भूत-प्रेत नहीं है। कोई डरावनी घटनाएँ नहीं होती, बस पत्र आते हैं। एक के बाद एक पत्र आते हैं। पत्र जिनमें लिखी होती हैं वे बातें जो उस परिवार में घट रही हैं। वे बातें जिनके बारे में और कोई नहीं जानता।
ब्रेनाक्स फैमिली अपने सभी एसेट्स बेचकर इस खूबसूरत विला को खरीदती है और वहाँ जाने के अगले ही दिन पाती है कि उनके पड़ोसी उनके लॉन में घुस गए हैं। अपनी प्रायवेसी के प्रति बेहद सजग इस परिवार की उनसे बहस हो जाती है और वे उनसे मिली धमकी के बाद भुनभुनाते हुए घर में आते ही हैं कि उन्हें वह पत्र मिलता है। एक अनजान प्रेषक द्वारा भेजा गया वह पत्र खलबली मचा देता है। लोकल पुलिस को बुलाया जाता है जिसके उदासीन रवैये से खिन्न ये परिवार चिंता में रहता है। बड़ी चिंता होती है बच्चों की सुरक्षा की। तभी घर में घुसपैठ होती है और दूसरी तरफ के उस मानसिक अक्षम पड़ोसी की अजीब सी बहन के साथ हुई झड़प इस चिंता को बढ़ा देती है। घर की सुरक्षा के लिए कैमरे लगवाए जाते हैं। घर में रिनोवेशन का काम चलता है। घर का बजट बढ़ रहा है। मानसिक तनाव ब्रेनाक्स के काम को प्रभावित कर रहा है। पत्र आना जारी है और तमाम छानबीन के बाद भी उन्हें भेजने वाले का पता नहीं चलता है। इस बीच विला बेचने वाली ब्रोकर उसे बार-बार बेचने को कहती है। रिनोवेशन के बीच ब्रेनाक्स के पहले वहाँ रहने वाले कुछ परिवारों की भयावह कहानियाँ सामने आती हैं।
हर एपिसोड का तानाबाना कुछ इस तरह बुना गया है कि शक की सुई एक एक करके सभी पर घूमती है। उनके पड़ोसी, ब्रेनाक्स दंपत्ति, ब्रोकर, पहले वहाँ रहने वाले परिवार से लेकर बाद में सामने आये कुछ किरदारों तक हर शख्स शक के दायरे में आता है और दर्शक खुशी से उछल जाता है कि सीरीज खत्म होने के पहले उसने गुत्थी सुलझा ली लेकिन तभी एक नया किरदार शक के दायरे में आ जाता है। बिना चीख चिल्लाहट के एक तनाव टीवी स्क्रीन से होता हुआ दर्शकों पर छा जाता है जो उसे एक के बाद दूसरा एपिसोड देखने को विवश करता है। हर एक शख्स जो पर्दे पर आता है वही है इन सबके पीछे, का विश्वास अगले ही फ्रेम में धराशायी हो जाता है। इस तनाव के कारण पति-पत्नी के बिगड़ते रिश्ते पडोसियों की नफरत उनकी कारस्तानी चलती रहती हैं। अपने अतीत से प्यार करने वाले उसे उसके परिवेश को ज्यों का त्यों रखने की चाह रखने वाले लोग कुछ हद तक सनकी हो जाते हैं। ऐसे पड़ोसी अपने आसपास आये नये लोगों को बदलाव को बर्दाश्त नहीं करते और किसी न किसी बहाने उसे अपनी ओर से खारिज करते हैं। इसलिये पड़ोसियों की ओर शक की सुई घूमती रहती है।
दरअसल, ये सीरीज एक असली घटना पर आधारित है जो सन 2014 में हुई थी। एक शानदार विला के नाम आने वाले पत्रों ने परिवार को इस तरह डरा दिया कि वे कभी उस घर में रहने ही नहीं गये। उन्होंने उसे किराये पर चढ़ा दिया और अंततः नुकसान उठाकर 2019 में बेच दिया। इस लिमिटेड सीरीज में उस घटना का अति नाटकीय रूपांतरण है। इसमें कई घटनाओं तथ्यों को जोड़कर इसे सीरीज के रूप में बनाया गया है। हाँ इसमें व्याप्त रोमांच तनाव और डर का संतुलन इसकी विशेषता है। नेटफ्लिक्स पर छह एपिसोड की यह सीरीज हिन्दी में डब है। कहीं कहीं गालियों का प्रयोग टाला जा सकता था। हर एपिसोड लगभग एक घंटे का है। यह सीरीज डेरेक और मारिया ब्राडस अभिनीत और ईशाना नाईट शयामलन द्वारा निर्देशित है।
मेरा दृष्टिकोण
इस सीरीज में वातावरण ऐसा प्रभाव डालता है कि दर्शक उसमें डूब जाता है। बिना भयानक घटनाओं के भी एक भय अंदर तक उतरता है। ऐसी साइकोलाजिकल हाॅरर सीरीज एक बैठक में देखने का अलग ही मजा है। इसमें आप जीवन में होने वाली घटनाओं का मानव जीवन उसके रिश्तों नौकरी आदि पर पड़ने वाले प्रभाव के साक्षी बनते हैं।व्यक्ति के बदलते स्वभाव उसकी विचित्रता को देखते हुए समझ सकते हैं कि क्यों हमारे यहाँ जीवन को सादगी से जीने की सीख दी जाती है। टीन एज बच्चों के अकेलेपन उनकी उन्मुक्तता पुलिस प्रशासन का उदासीन रवैया पड़ोसियों का विचित्र व्यवहार आदि आपको अपने को और आसपास देखने की दृष्टि देता है। कुल मिलाकर सीरीज आपको बांधे रखती है।

