अनाम पथ का पथिक: आत्ममंथन और सरोकारों की यात्रा

  • पूजा सिंह

स्‍वतंत्र पत्रकार

यह अनिवार्य रूप से घटित हुआ भी एक साधारण दस्तावेज है। यह न तो कहानी है, न यात्रा वृतान्त। यह एक व्यक्ति की “लौटने” की गाथा है। विभूति दा की यह डायरी अबूझ सी सच्ची कहानी है। यह सत्य की अभिव्यक्ति है। –चिन्मय मिश्र

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