hindi film

मेरे अहसासों का इकबाल मैदान, जम्हूरियत और शाहीन जिसकी शान

मेरे लिए यह सिर्फ एक मैदान नहीं है। इसी मैदान ने यह अहसास कराया कि कोई सावर्जनिक स्थल सत्ता से सवाल पूछने और सबको इंसाफ मिले, बराबरी का दर्जा मिले, इसकी खोज के मंच भी हो सकते हैं।

मेरे अहसासों का इकबाल मैदान, जम्हूरियत और शाहीन जिसकी शान जारी >

14 मिनट सितार दिल को छलनी करता है और तबला विचारों को बेचैन

इस फिल्‍म को देखते हुए सिर्फ महसूस किया जा सकता है। महसूस किया जा सकता है कि शाब्‍दिक, मानसिक और शारीरिक हिंसा किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है।

14 मिनट सितार दिल को छलनी करता है और तबला विचारों को बेचैन जारी >

फैंड्री: सिर्फ सिनेमा नहीं, समाज का आईना

‘फैंड्री’ फिल्म ने एक बार फिर याद दिलाया कि जिंदगी अमर चित्रकथा जैसी बिल्कुल नहीं है। शहरों में पले बढ़े युवाओं को ‘फैंड्री’ के गांव को देखकर झटका सा लगता है। वह फिल्मों में नजर आने वाला कोई यूटोपियन गांव नहीं है।

फैंड्री: सिर्फ सिनेमा नहीं, समाज का आईना जारी >

एक दूजे के लिए: एक खूबसूरत मौसम की याद

‘एक दूजे के लिए’ उस ज़माने की फ़िल्म थी जब प्रेम होते ही प्रेमीजन बिस्तर पर कूद नहीं जाते थे। प्रेम का मतलब तब रोमांस ही होता था,’लव मेकिंग’ नहीं। कुछ झिझक बाक़ी थी। उदारीकरण आठ दस साल और दूर था।

एक दूजे के लिए: एक खूबसूरत मौसम की याद जारी >

लव ऑल: जिंदगी की कोर्ट पर अपना मैच

अगर यह कहूं कि यह फिल्‍म सिनेमा की भाषा में लिखी गई कविता है तो यह बहुत सतही टिप्‍पणी होगी। आसान सी। ऐसा लगेगा कि उस कवित्‍त तक पहुंचा ही नहीं जो सिनेमा में रचा गया है।

लव ऑल: जिंदगी की कोर्ट पर अपना मैच जारी >