नक्सलवाद के एक काल्पनिक बिजूके को प्रतीक बनाया गया
आज तय किया है कि घोसलिया से काफी दूरी पर तीसरा बांध देखने जाएंगे जो इसी साल पूरा हुआ है और जिसमें पहली बार पानी भरा है।
नक्सलवाद के एक काल्पनिक बिजूके को प्रतीक बनाया गया जारी >
आज तय किया है कि घोसलिया से काफी दूरी पर तीसरा बांध देखने जाएंगे जो इसी साल पूरा हुआ है और जिसमें पहली बार पानी भरा है।
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झाबुआ जिले में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर काफी समय से चल रहा है। मैं पहले कभी झाबुआ नहीं गया था इसलिए जाने की इच्छा तो है।
दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
भोपाल करीब आने लगा तो मैं ट्रेन में ऊपर चढ़कर बैठ गया… जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
जीवन में पहली बार रोजदारी की थी, वह भी भक्ति की! जारी >
‘हेति’ महज एक कथा नहीं है। यह पौराणिक कथा के आगे एक विमर्श का आधार खड़ा करती है। कहानी खत्म हो जाती है पर इसके सवालों की गूंज देर तक पाठक के मन-मतिष्क में ठहरी रहती है।
‘ना’ कहने का साहस: पौराणिक नायिका सुकन्या आज की हेति जारी >
शाम के पांच बजे होंगे। एकाएक दो मोटरसाइकलें आकर रूकीं और उसमें से चार लोग उतरे। मैं रामायण पढ़ता रहा पर मन में आया कि ये लोग अचानक यहां कैसे आ धमके?
वाह, पचास रुपए? बड़े दिनों बाद इतने रुपए एक साथ देखे थे… जारी >
इस जगह आकर जेल जैसा लग रहा है, खुली जेल। याद आया आंदोलनों के दौरान जेल में बिताया गया वक्त। वहां भी ऐसा ही वातावरण और खाना मिलता था। वैसे तीन बार जेल गया हूं।
मैंने सोचा, खतरनाक होने के लिए खतरनाक होना जरूरी नहीं होता जारी >
देखा जाए तो, बुढ़ापा सिर्फ बंद होते दरवाजों और खिडकियों का नाम नहीं, बल्कि एक नए नजरिए के खुलने का भी संकेत है।
बुढ़ापे की गरिमा को कायम रखने के लिए ख्याल तो बढ़िया है… जारी >
जीवन में शायद पहली बार किसी से कुछ मांगा था। स्वयं को इस तरह सुनकर बहुत अच्छा लगा। दरअसल, इसका अर्थ हुआ कि मैंने अपने ‘दंभ’ पर पहली विजय प्राप्त की है।
उसने मेरे पैर छू कर कहा, बाबा, कहीं मत जाओ, तुम जैसे महात्मा की जरूरत है जारी >
मैं जिस उद्देश्य के साथ निकला था, कि नर्मदा जी पहुंचना है, उसके अप्रतिम जल को ओर बढ़ा। धीरे-धीरे पानी तक पहुंचा। जल का स्पर्श किया। नर्मदा जी में थोड़ा अंदर गया, वहां आचमन किया। कुछ देर वहीं खड़ा रहा।
भोजन करने और भोजन पाने के बीच का अंतर भी समझ आने लगा जारी >