lifenotes

मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला…

किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।

मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >

बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने  

पद्मश्री बशीर बद्र को देखकर इस बात का इत्‍मीनान हुआ कि आज भी हिंदुस्तान में उर्दू की एक अजीम हस्ती मौजूद है। हालांकि मुलाकात एक तरफा ही थी। डॉ. साहब अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे। 

बशीर ब्रद से वह मुलाकात… जब चेहरा किताबी था सामने   जारी >

ज्ञान भी ज्ञानियों का पीछा करता है,उन्हें संरक्षण भी देता है…

सच्चा ज्ञान प्रकाश है और नीरव एकांत के बीहड़ में,अंधेरे में प्रकाश का स्पार्क खुरदुरे चकमक पत्थर की रगड़ से पैदा होता है। यहां खुरदुरेपन को दु:ख, असीम दुःख समझें।

ज्ञान भी ज्ञानियों का पीछा करता है,उन्हें संरक्षण भी देता है… जारी >

कविता की क्यारियों के बीच मोहब्बत का दरिया और इंसानियत का जल

कवि की चिंता इस समाज में हो रहे परिवर्तन, आम आदमी के प्रति बढ़ती जा रही उपेक्षा से है। रतन चौहान अपनी कविताओं में कठपुतलियों में बदलते समाज के प्रति चिंतित हैं।

कविता की क्यारियों के बीच मोहब्बत का दरिया और इंसानियत का जल जारी >

जो इच्छा से बंधा हुआ नहीं है,वह मुक्त है,जो स्वतंत्र है वही निर्भय है…

जीवन में संतुलन का नाम शून्यता है,संतुलन बिन्दु ही निर्भयता का केन्द्र है,यही निर्भय बनाता है,यहीं ऊर्जा लहर का उच्चतम शिखर है।

जो इच्छा से बंधा हुआ नहीं है,वह मुक्त है,जो स्वतंत्र है वही निर्भय है… जारी >

अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें…

यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।

अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें… जारी >

वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है…

इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।

वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है… जारी >

मैंने सीखा, रास्ते चलने के लिए बनाए जाते हैं, इंतजार के लिए नहीं

कट्ठीवाड़ा से तो अब समेटना ही होगा। बहुत भारी मन से यह स्वीकारना होगा, यह एक बड़ी हार है। सम्मान और प्रेम तो यहाँ भी है लेकिन सिर्फ इसके साथ काम कर पाना संभव नहीं है।

मैंने सीखा, रास्ते चलने के लिए बनाए जाते हैं, इंतजार के लिए नहीं जारी >

टर्निंग पाइंट आ ही गया, नारे लगे− बाबा, हम तुम्हारे साथ हैं…

मैं अंततः अब जीवन के अपने संभवतः सबसे रचनात्मक काल में प्रवेश कर रहा हूँ। देखते हैं, कितना क्या संभव हो पाता है!

टर्निंग पाइंट आ ही गया, नारे लगे− बाबा, हम तुम्हारे साथ हैं… जारी >

एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार

लगता है एक “लक्ष्यहीन यात्रा” पर निकल पड़े व्यक्ति को लक्ष्य निर्धारित किये बिना ही सुखमय – सार्थक मनुष्य-जीवन जीने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो गया।

एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार जारी >