वो दर्द उठा फ़िराक़ कि मैं मुस्कुरा दिया…
एक रात भी पूरी एक जिंदगी की तरह होती है। सुबह चेहरे पर आई मुस्कुराहट सारे दर्द को ग़ायब कर देती है और एक नई ज़िन्दग़ी की शुरुआत की तरफ अग्रसर करती है।
वो दर्द उठा फ़िराक़ कि मैं मुस्कुरा दिया… जारी >
एक रात भी पूरी एक जिंदगी की तरह होती है। सुबह चेहरे पर आई मुस्कुराहट सारे दर्द को ग़ायब कर देती है और एक नई ज़िन्दग़ी की शुरुआत की तरफ अग्रसर करती है।
वो दर्द उठा फ़िराक़ कि मैं मुस्कुरा दिया… जारी >
जीवन में भी यही होता है कि दो समान विचार वाले व्यक्ति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे क़रीब नहीं आते लेकिन फिर भी दोनों के मध्य एक संबंध स्थापित होता है।
ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है… जारी >
एक लिहाज से यह शेर प्रकृति के ज़रिए परमात्मा तक भी पहुंचता है। इश्तियार के ज़रिए इंसान की रूह तक भी पहुंचता है और इशारों के ज़रिए क़ुदरत के इरादों तक भी पहुंचता है।
नए पत्तों की आहट से भी शाख़ें भीग जाती हैं… जारी >
उदास धूप की शाख़ पर रात रखना ऐसा ही है, जैसे एक मुरझाए हुए पौधे को सूरज की सोहबत में या खुले वातावरण में रख दिया जाए।
उदास धूप की टहनी पे रात रख देना… जारी >
किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।
मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >
अल्फ़ाज़ से मोहब्बत सीखाने वाले, एहसासों को शायरी में ढाल देने वाले बशीर बद्र साहब को अलविदा। आपकी शायरी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी शायरी की खासियत को रेखांकित करते एक खास शेर की बात-
बशीर बद्र की यादों के उजाले: प्यार के एहसास को ओढ़ना, सलीके से गुजरना जारी >
यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।
अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें… जारी >
इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।
वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है… जारी >
लफ़्ज़ी मआनी पर ग़ौर करें तो यह शेर नाउम्मीदी में उम्मीद जगाने की बात करते हुए कहता है कि हर आशा निराशा में ही मौजूद होती है।
रात को तब्दील होते रोशनी में देखिए… जारी >
शेर जीवन की उस हक़ीक़त को भी बयां कर रहा है जिसमें कई सारे अक़्स हमें नज़र आते हैं। आगे की ओर जाने की इच्छा से कुछ क़दम पीछे लौटना बुरा नहीं होता।
लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले… जारी >