urdu shayari

मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा…

जीवन हमेशा अपने भीतर के हौसलों और इच्छाशक्ति के बल पर ही जिया जाता है। जो लोग किसी के सहारे जिंदगी गुज़ारते हैं वे कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।

मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा… जारी >

बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया…

यहां एक पहेली भी नज़र आती है जो बारिश के हर्फ़ को उल्टाने की बात कह रही है। बारिश लफ्ज़ जिन तीन हर्फ़ों से मिलकर बना है। उन्हें अगर उल्टा दिया जाए तो वह शराब लफ्ज़ के हर्फ़ों में तब्दील हो जाता है।

बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया… जारी >

जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो…

अगर अपनी मंज़िल तक पहुंचना है तो इस संजीदगी के साथ सफ़र तय किया जाए कि किसी को पता न चले और आपकी मंज़िल आपके कदमों में हो।

जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो… जारी >

हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे…

यह जीवन दर्शन से जुड़ा शेर है। जो हमारे भीतर होता है उसे हम देख नहीं पाते और जो सामने दिखता है उसे सही समझ कर ज़िन्दगी भर तड़पते रहते हैं।

हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे… जारी >

मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता…

इंसान को अपनी दिनचर्या जागने की तरफ तो ले आती है लेकिन जागने के बाद एक इंसान ऐसा कुछ नहीं कर पाता कि वह ज़िंदा भी महसूस हो।

मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता… जारी >

एक ही घूंट में दीवाने जहां तक पहुंचे…

हर ऊंचाई पर पहुंचकर महसूस होता है कि यह वह ऊंचाई नहीं है जिसकी तमन्ना रही है। तो फिर वहां कैसे पहुंचा जा सकता है?

एक ही घूंट में दीवाने जहां तक पहुंचे… जारी >

जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस को…

इसे ज़िन्दगी की ज़रूरियात और इंसानी हक़ों के नज़रिए से समझना नए अर्थ खोलता है। सरपरस्त जब अपनी रिआया को नज़रंदाज़ कर देता है तो उसे कहीं सहारा नहीं मिलता है।

जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस को… जारी >