तेरी गली से गुज़रता हूं इस तरह ज़ालिम…

  • आशीष दशोत्‍तर

साहित्‍यकार एवं स्‍तंभकार

संपर्क: 9827084966

3 thoughts on “तेरी गली से गुज़रता हूं इस तरह ज़ालिम…”

  1. डॉ मनोहर जैन 9425356086

    जालिम सरकार है ,गुजरता हूं उपभोक्ता ,पानी की धार जीएसटी टैक्स हर उपभोक्ता इस जालिम सरकार को जीएसटी टैक्स ऐसे देता है जैसे रेत में गुजरती हुई पानी की धार क्योंकि हर वस्तु हर सेवा खरीदते समय कीमत के भीतर ही छुपी रहती है टैक्स की राशि बील चुकाते वक्त हमें उसका एहसास ही नहीं होता और जालिम सरकार हमसे ले लेती है
    आप अपने उर्दू अल्फ़ाज़ में इसे सवार सकते हैं इस शेर का यह आर्थिक पहलू भी है

  2. डॉ मनोहर जैन 9425356086

    जालिम सरकार है ,गुजरता हूं उपभोक्ता ,पानी की धार जीएसटी टैक्स हर उपभोक्ता इस जालिम सरकार को जीएसटी टैक्स ऐसे देता है जैसे रेत में गुजरती हुई पानी की धार क्योंकि हर वस्तु हर सेवा खरीदते समय कीमत के भीतर ही छुपी रहती है टैक्स की राशि बील चुकाते वक्त हमें उसका एहसास ही नहीं होता और जालिम सरकार हमसे ले लेती है
    आप अपने उर्दू अल्फ़ाज़ में इसे सवार सकते हैं इस शेर का यह आर्थिक पहलू भी है

  3. डॉ मनोहर जैन 9425356086

    जालिम सरकार है ,गुजरता हूं उपभोक्ता ,पानी की धार जीएसटी टैक्स हर उपभोक्ता इस जालिम सरकार को जीएसटी टैक्स ऐसे देता है जैसे रेत में गुजरती हुई पानी की धार क्योंकि हर वस्तु हर सेवा खरीदते समय कीमत के भीतर ही छुपी रहती है टैक्स की राशि बील चुकाते वक्त हमें उसका एहसास ही नहीं होता और जालिम सरकार हमसे ले लेती है
    आप अपने उर्दू अल्फ़ाज़ में इसे सवार सकते हैं इस शेर का यह आर्थिक पहलू भी है

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