प्रकृति से मन तक हर तरफ फाग, इनमें आप कहां हैं?
हर जगह बस और बस खुशियों का रेला है। हंसते-गाते-नाचते लोगों का मेला है। रंग-अबीर-गुलालों का उड़ता बादल है तो सिर चढ़कर बोलते अबीर से बहका-बहका लोगों का मन है।
प्रकृति से मन तक हर तरफ फाग, इनमें आप कहां हैं? जारी >










