सुनो लड़कियो,बाज़ के गुण सीखो
सुंदर, असुंदर में/ भी मत उलझो। दुनिया भर में/ सम्मान पाने वाली/ महिलायें निरी सामान्य रही हैं चेहरे से/ गढ़ो व्यक्तित्व। सशक्तिकरण माँगती क्यूँ हो?
सुनो लड़कियो,बाज़ के गुण सीखो जारी >
सुंदर, असुंदर में/ भी मत उलझो। दुनिया भर में/ सम्मान पाने वाली/ महिलायें निरी सामान्य रही हैं चेहरे से/ गढ़ो व्यक्तित्व। सशक्तिकरण माँगती क्यूँ हो?
सुनो लड़कियो,बाज़ के गुण सीखो जारी >
शाम के पांच बजे होंगे। एकाएक दो मोटरसाइकलें आकर रूकीं और उसमें से चार लोग उतरे। मैं रामायण पढ़ता रहा पर मन में आया कि ये लोग अचानक यहां कैसे आ धमके?
वाह, पचास रुपए? बड़े दिनों बाद इतने रुपए एक साथ देखे थे… जारी >
मैं जिस उद्देश्य के साथ निकला था, कि नर्मदा जी पहुंचना है, उसके अप्रतिम जल को ओर बढ़ा। धीरे-धीरे पानी तक पहुंचा। जल का स्पर्श किया। नर्मदा जी में थोड़ा अंदर गया, वहां आचमन किया। कुछ देर वहीं खड़ा रहा।
भोजन करने और भोजन पाने के बीच का अंतर भी समझ आने लगा जारी >
इस पूरी गाथा में कुछ भी उपदेशात्मक नहीं है। यह नैतिकता का पाठ भी नहीं पढ़ाती। यह एक ऐसी रचना है, जो सिखाती है, कि बिना किसी को दुखी किए कैसे अपना जीवन जिया जा सकता है।
अनजान द्वारा खुद को समझे जाने से जीवन मनोहारी हो गया जारी >
हर जगह बस और बस खुशियों का रेला है। हंसते-गाते-नाचते लोगों का मेला है। रंग-अबीर-गुलालों का उड़ता बादल है तो सिर चढ़कर बोलते अबीर से बहका-बहका लोगों का मन है।
प्रकृति से मन तक हर तरफ फाग, इनमें आप कहां हैं? जारी >
कब और कैसे शादी सिर्फ दो इंसानों की भावनात्मक शारीरिक आवश्यकता से आगे बढ़कर इच्छाओं की लंबी फेहरिस्त हो गई?
लोग शादी क्यों करते हैं? जारी >
श्री महाकालेश्वर के दर्शन हेतु शारीरिक एवं मानसिक मजबूती दोनों जरूरी है क्योंकि ये वही देव हैं जो अपने ही शादी में रानी मैनावती की परिक्षा लेने में भी पीछे नहीं रहे।
उज्जैन में पग-पग पर बाबा महाकाल की महिमा का दर्शन जारी >
उमा-महेश सृष्टि का पहला/ जोड़ा है, उमा-महेश की ही/ जुड़ी सबसे पहले गाँठ/ और धरती ने पहली बार बिआह-सुख निहारा…
शिव फूल रचते हैं और गौरा सुगंध भरती हैं जारी >
शेर जीवन की उस हक़ीक़त को भी बयां कर रहा है जिसमें कई सारे अक़्स हमें नज़र आते हैं। आगे की ओर जाने की इच्छा से कुछ क़दम पीछे लौटना बुरा नहीं होता।
लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले… जारी >
इस फिल्म को देखते हुए सिर्फ महसूस किया जा सकता है। महसूस किया जा सकता है कि शाब्दिक, मानसिक और शारीरिक हिंसा किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है।
14 मिनट सितार दिल को छलनी करता है और तबला विचारों को बेचैन जारी >