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ये कैसा रब्त है जो फ़ासले बढ़ाता है…

जीवन में भी यही होता है कि दो समान विचार वाले व्यक्ति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे क़रीब नहीं आते लेकिन फिर भी दोनों के मध्य एक संबंध स्थापित होता है।

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एक के बाद एक पत्र आते हैं और परिवार डरता जाता है

न्यूजर्सी के सबर्ब वेस्टफील्ड की ऐसी ही एक शानदार विला 657 बुलावर्ड की ये कहानी अपने आप में इसलिए अलग है क्योंकि इसमें कोई भूत-प्रेत नहीं है।

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उदय प्रकाश की नई कहानी ‘कपटकाल में कवि’: एक टिप्पणी

उदय जी ने लिखा है यह कहानी का पहला ही ड्राफ्ट है। पहले ड्राफ्ट के इतने अधिक पाठ हो गए हैं कि शायद खुद उदय जी भी चकित होंगे।

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आवाज़ों के जुगनू: लफ़्ज़ों का ये दरिया अच्छा लगता है…

वे आवाजें जो रोज हमारे संग होती हैं, उनके पीछे की यात्रा को जानना बेहद दिलचस्प है। आवाज़ की दुनिया के सितारों की बातों में जीवन का फलसफा दिखाई देता है।

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खाली हुई जगह को जीवन से जोड़ने की कोशिश करती सीरीज

फिल्म बहुत हौले से बताती है कि जीवन में जब कुछ बुरा हो उससे भागने के बजाय उसका सामना किया जाना चाहिए। जिस दिन ये समझ लिया, उस दिन बहुत कुछ सुलझ सँवर जाता है।

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नए पत्तों की आहट से भी शाख़ें भीग जाती हैं…

एक लिहाज से यह शेर प्रकृति के ज़रिए परमात्मा तक भी पहुंचता है। इश्तियार के ज़रिए इंसान की रूह तक भी पहुंचता है और इशारों के ज़रिए क़ुदरत के इरादों तक भी पहुंचता है।

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लुभा लेता है झक सफेद और नाजुक टिश्यू पेपर

झक सफेद टिश्यू पेपर… ऐसा साफ कि बस देखते रहिए, पर यह भी सच है कि टिश्यू पेपर जब तक पैकट में रहता है तभी तक साफ रहता है।

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Guru Dutt: मानो जीवन का आख़िरी शॉट बड़े मनोयोग से रचा हो

एक असंतुष्ट, अतृप्त मन लिए गुरु दत्त अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उन से जोड़े हुए है।

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अलका सरावगी के उपन्यास को अधूरा ही छोड़ दिया…

इस उपन्यास के प्रारंभ में ही यह नजर आने लगा कि लेखिका ज़िद की हद तक अपने पात्रों को कभी बोलने नहीं देती; वह खुद उनके भीतर बैठकर लगातार खुद ही बोलती रहती है।

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