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बाबा जान: एक अनकही कथा

उनका ‘अम्मा साहब’ कहलाना भी एक गहरे आध्यात्मिक अर्थ को धारण करता था। उनका अस्तित्व, उस एकता के महासागर में विलीन हो चुका था, जहां न स्त्री थी, न पुरुष, केवल ईश्वर के प्रेम की अनंत धारा थी।

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तू जहां तक दिखाई देता है, उससे आगे मैं देखता ही नहीं

शायरी वो कमाल की है कि सीधे दिल में उतरती है। वैसे ही जैसे दिल से कही जाती है। उन्‍हें खूब सुना गया। जितना सुना गया उससे ज्‍यादा सुनाया गया। कभी अपने हाल बताने के लिए, कभी अपने दिल की कहानी जताने के लिए।

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माह में एक फिल्‍म देखता लेकिन बैठता बालकनी में ही

जयेंद्रगंज, ढोली बुआ का पुल, इंदरगंज, हजीरा और मुरार में जैसे कोचिंग क्लासेस और गुरुजनों की बड़ी-छोटी दुकानें सज गईं। छात्र-छात्राओं का रेला दिन भर शहर की सड़कों पर भेड़ों की तरह भटकता रहता।

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तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सबसे ज्यादा कुपोषण

विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ब्लेक डेथ नामक महामारी से की है जिसने 18 वीं सदीं में यूरोप की जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को निगल लिया था।

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छत पर पढ़ने वाली लड़की असल में लड़का निकली

मुझे – 1.5 का चश्मा चढ़ेगा। चश्मा बनवाया गया। पता चला जिस बिल्डिंग की छत पर पढ़ने वाली को मैं लड़की समझता था, वो दरअसल एक लड़का था।

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मेंटल हेल्‍थ: थोड़ा रवैया बदलें, ज्‍यादा आर्थिक ताकत दें

एक मनोचिकित्सक के रूप में मेरा मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बजट बढ़ाना अति आवश्यक है, ताकि इसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के रूप में देखा जा सके और सभी तक पहुंच सुनिश्चित हो।

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यह एग्जिट पोल तो हमें बीमार कर रहा है…

अक्‍सर जब परिणाम आते हैं तो एग्जिट पोल औंधे मुंह गिरे होते हैं। चूक वहीं होती है जब एग्जिट पोल को परिणाम का ट्रेलर मान लिया जाता है।

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मेरे होश उड़ गए, वही पेपर आया, जो कल मिला था

मैं भ्रमित था। जो पर्चा मैंने रात को देखा था, हूबहू वही मेरे सामने था। मुझे विश्वास नहीं हुआ, कुछ देर तक मैं इसी भ्रम में रहा कि मैं ठीक से पढ़ नहीं पा रहा हूं।

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वर्ल्‍ड स्माइल डे: जब मुस्कान को चेहरा मिला

जब-जब आप किसी को मुस्कराते देखें तो हार्वी बाल को जरूर याद करें जिन्होंने मुस्कान को एक नया चेहरा दिया।

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