मनरंग

वकालत छोड़ी, फिर अपनाई, मैं उलझता चला जा रहा था…

मुझे पूरे समय यह अहसास था कि जो मैं कर रहा हूं, मैं उसके लिए नहीं बना हूं। वकालत का पेशा एक संवेदनशील व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है।

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भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा…

लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।

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खबर फैल गई कि मैं ‘बैरागी’ हूं, इनाम नहीं मिलेगा

लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।

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अपने गांव भंवरताल में हूं; एक वो दिवाली थी, एक ये दिवाली है, एकदम अलग

सब कुछ छोड़ देने की संकल्पना के बावजूद ऐसा बहुत कुछ हम सबके पास होता है, जो कभी भी छूटता नहीं। शायद यही अपनापन और जुड़ाव हमें हमेशा जीवंत भी बनाए रखता है।

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पूरे पच्चीस साल बाद पैदल अपने गांव भंवरताल जा रहा हूं…

झाबुआ से धार आते हुए मैं सोच रहा था कि लगातार विरोधाभासी रहवासी परिस्थितियों में रह पाना कितना सार्थक हो पाएगा। जब तक आगे के कार्य की स्पष्टता तक यह चलाया जा सकता है।

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दहेज का दबाव न हो तो हर मर्द चार-पांच ब्याह कर लेगा

मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।

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संभवतः किसी को उम्मीद नहीं होगी कि मैं इस तरह फट पडूंगा…

मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।

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मैं सन् उन्नीस सौ बावन में सातवीं फेल हुआ हूं…

उस जीप में कम से कम 30 लोग तो रहे ही होंगे। यह समझ नहीं आ रहा था कि ड्राइवर अंदर है या बाहर? वह आगे देख कैसे पा रहा होगा?

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सौ दिन पूरे… लगता है घर से बहुत दूर न जाकर गलती कर दी

इन आदिवासियों की नैसर्गिक प्रतिभा और सौंदर्य दृष्टि को लेकर मैं जरूर सम्मोहित हो रहा था। स्पष्ट कहूं तो सम्मोहित हो गया था।

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घर बनते जाते हैं, जमीन बंटती चली जाती है लेकिन रहते सब साथ-साथ हैं

मैं नैतिक और अनैतिक की दुविधा से गुजर रहा था। मगर यहां का आदिवासी समुदाय इसे जिस सहजता से स्वीकार और अंगीकार कर रहा है, वह वास्तव में शोध का विषय हो सकता है।

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