बाबरौ बनाइ कै बैरागी कहलावत हैं

आशु चौधरी वृषभानु की लली देखऐसो चढ्यो राग-रंगमोरपंख धारी योंटेढ़े मुसक्यावत हैंललिता-विशाखा कूं दैचकमा भये यों चम्पतअकेली कर श्यामा जू केचरण पखरावत हैंअसीम लीला करत श्यामभनक न नैकूं दैकेरसिकन कूं बीच ठौरटेढो नचावत हैंराखत हैं दूरी परदूर राखत रागन तेबाबरौ बनाइ कैबैरागी कहलावत हैं। भावार्थ:-वृषभानु की लाली हमारी प्रिय श्री श्यामा जू को देख कर…

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सबसे अच्‍छा समय, सबसे खराब समय

शांतिलाल जैन, प्रख्‍यात व्‍यंग्‍यकार ‘‘यह सबसे अच्छा समय था, यह सबसे खराब समय था।’’ इन पंक्तियों के लेखक ब्रिटिश उपन्यासकार चार्ल्स डिकन्स कभी भारत आए थे या नहीं मुझे पक्के से पता नहीं, मगर पक्का-पक्का अनुमान लगा सकता हूं कि वे भारत आए ही होंगे और उज्जैन भी। दोपहर में दाल-बाफले-लड्डू सूतने के बाद तीन…

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