शिव फूल रचते हैं और गौरा सुगंध भरती हैं
उमा-महेश सृष्टि का पहला/ जोड़ा है, उमा-महेश की ही/ जुड़ी सबसे पहले गाँठ/ और धरती ने पहली बार बिआह-सुख निहारा…
शिव फूल रचते हैं और गौरा सुगंध भरती हैं जारी >
उमा-महेश सृष्टि का पहला/ जोड़ा है, उमा-महेश की ही/ जुड़ी सबसे पहले गाँठ/ और धरती ने पहली बार बिआह-सुख निहारा…
शिव फूल रचते हैं और गौरा सुगंध भरती हैं जारी >
आज के समय में एक युवा कवि द्वारा अंतर्मन के गंभीर संकेतों की ये अभिव्यक्तियां चौंकाती हैं और भविष्य के प्रति आश्वस्त भी करती हैं।
अंश की यात्रा: एक अनूठे कवि की सांगीतिक दस्तक जारी >
ये कविताएं प्रेम के होने का उत्सव है। ‘होना’ यानी अस्तित्व। अपने अस्तित्व को पहचान से उपजी अभिव्यक्ति।
‘रास्ते पर चलना’ जीवन में भटक जाने का पर्याय था… जारी >
आधुनिक हिंदी कवियों ने राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों के साथ यथार्थ को अपनी कविताओं में रेखांकित किया है। वहीं आशीष कुमार शर्मा ‘भारद’ की रचनाओं में हमें छायावाद की विशेषताओं की झलक मिलती है।
जो कुछ आया सम्मुख सब उपमान तुम्हारे नाम किए… जारी >
ग्राम्य जीवन के साथ रिश्तों और प्रेम की महीन गुंथन सुदर्शन व्यास की रचनाओं की विशिष्टता है। उनकी रचनाओं में शब्दों का आडंबर नहीं भाव की सादगी झलकती है।
जब शब्द नहीं पहुंचते, चुप्पी पहुंचाने की कोशिश करता हूँ… जारी >