… तो चलो आज कुछ चाँद हो जाए
पहली बार किसने पहचाना होगा कि यह है शरद की पूर्णिमा? किसने दिया होगा इसे यह नाम? शरद की पूनम पर भाव खिल आते हैं…
… तो चलो आज कुछ चाँद हो जाए जारी >
पहली बार किसने पहचाना होगा कि यह है शरद की पूर्णिमा? किसने दिया होगा इसे यह नाम? शरद की पूनम पर भाव खिल आते हैं…
… तो चलो आज कुछ चाँद हो जाए जारी >
आशु चौधरी वृषभानु की लली देखऐसो चढ्यो राग-रंगमोरपंख धारी योंटेढ़े मुसक्यावत हैंललिता-विशाखा कूं दैचकमा भये यों चम्पतअकेली कर श्यामा जू केचरण पखरावत हैंअसीम लीला करत श्यामभनक न नैकूं दैकेरसिकन कूं बीच ठौरटेढो नचावत हैंराखत हैं दूरी परदूर राखत रागन तेबाबरौ
बाबरौ बनाइ कै बैरागी कहलावत हैं जारी >
शांतिलाल जैन, प्रख्यात व्यंग्यकार ‘‘यह सबसे अच्छा समय था, यह सबसे खराब समय था।’’ इन पंक्तियों के लेखक ब्रिटिश उपन्यासकार चार्ल्स डिकन्स कभी भारत आए थे या नहीं मुझे पक्के से पता नहीं, मगर पक्का-पक्का अनुमान लगा सकता हूं कि
सबसे अच्छा समय, सबसे खराब समय जारी >