एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार
लगता है एक “लक्ष्यहीन यात्रा” पर निकल पड़े व्यक्ति को लक्ष्य निर्धारित किये बिना ही सुखमय – सार्थक मनुष्य-जीवन जीने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो गया।
एक लक्ष्यहीन यात्राःकट्ठीवाड़ा के ‘बाबा’ बम्हनी में ‘दादा’, प्रेम व विश्वास ही आधार जारी >










