बाल कविता: बसंत आता है कब?
छुटकी चहकी,फिर से बोली/ बसंत आता है कब? कब?/ दीदी ने भी की ठिठोली,फूल खिलते हैं तब…
बाल कविता: बसंत आता है कब? जारी >
छुटकी चहकी,फिर से बोली/ बसंत आता है कब? कब?/ दीदी ने भी की ठिठोली,फूल खिलते हैं तब…
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आज आपको अपने संग सैर करवाती हूं मुरैना जिले के सिहोनिया कस्बे में स्थित ‘ककनमठ मंदिर’ की, जो भुरभुरी रेतीली मिट्टी वाले खेतों के बीच खड़ा इतराता है। यह मंदिर अपनी अचरज भरी विशिष्टता के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
कभी सही गिन नहींं पाएंगे इस मंदिर के स्तंभ जारी >
अगर यह कहूं कि यह फिल्म सिनेमा की भाषा में लिखी गई कविता है तो यह बहुत सतही टिप्पणी होगी। आसान सी। ऐसा लगेगा कि उस कवित्त तक पहुंचा ही नहीं जो सिनेमा में रचा गया है।
लव ऑल: जिंदगी की कोर्ट पर अपना मैच जारी >
सरकारी सर्वे के दौरान महिलाओं से बात करने के लिए घर आंगन में कुछ देर बैठना हो जाता था। ऐसे ही सर्वे में एकबार सुवासरा के मीणा मोहल्ले में जाना यादगार अनुभव बन गया।
गली-मोहल्ले में यूं मिल जाता है इनोवेशन जारी >
कभी लगता कि ऐसा होता उसके एक किरदार का नाम मेरा होता। मैं कभी उसके संग समंदर की लहरों में छलांगें लगाता, कभी गोद में उसकी सर रख, सो ही जाता। क्या भरोसा वो सो जाती कभी मेरी तहों में जैसे खो जाते है दो जिस्म चादर की सिलवटों में। क्या जाने, क्या होता। वो मेरी होती, मैं उसका होता।
जिंदगी क्या है? किताब पढ़ कर जाना जारी >