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जो किताबें पढ़कर बिगड़े वो जीवन में इंसान बन गये

आज विश्व पुस्तक दिवस है, हम जैसे पुस्तक प्रेमियों के लिए एक खास दिन। कहने वाले कहेंगे कि क्या किताब पढ़ने का भी कोई एक दिन हो सकता है? नहीं हो सकता है लेकिन जब अपने आसपास मोबाइल में डूबे और 10 से 30 सेकंड की फेसबुक-इंस्टा रील में डूबे युवाओं को देखती हूं तो मुझे लगता है कि किताबों की बात करना कई वजहों से जरूरी है

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व्‍हाइट स्‍टॉर्क से पूछ ही लिया, लिपिस्टिक लगाए हो?

ताल और पहाड़ियों के शहर भोपाल की खूबसूरती यहां के पंछियों से भी है। बीते दिनों भोज वेटलैंड मे व्हाइट स्टार्क या श्वेत राजबक के भी दर्शन हो ही गए। भोपाल मे इसका दिखना दुर्लभ है।

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ईडी ऐसी पूछताछ रोको, उसे जरा सोने दो

बॉम्बे हाईकोर्ट ने देर रात बयान दर्ज करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की आलोचना की। कोर्ट ने कहा है कि ईडी सोने का अधिकार छीनकर किसी व्यक्ति का रात में बयान दर्ज नहीं कर सकती: इसके बाद राइट टू स्लीप को लेकर एक नई बहस शुरू हो गयी है।

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Did you do it पूछता है यह खास पक्षी

पंछी बनूं उड़ती फिर नील गगन में… यह एक गाने की पंक्ति भर नहीं है बल्कि लगभग हर इंसान ने अपने जीवन में एक बार तो ऐसा सोचा ही होगा। शायद यही कारण है कि पंछियों की दुनिया हमें बहुत

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अपनी फितरत से जो है जंगल का कोतवाल

चमकीले काले रंग का ब्लैक ड्रोंगो पंछियों की दुनिया का आक्रामक पक्षी है। इसकी निडरता, हौसला और आक्रामकता के कारण इसे जंगल का कोतवाल कहा जाता है।

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केवल सच की घुट्‌टी से तोड़ा जा सकता है झूठ का नशा

इन दिनों जबकि प्रोपगंडा आधारित फिल्मों का बोलबाला है, इस फिल्म की खूबसूरती यही है कि यह फिल्म इतिहास के एक ऐसे घटनाक्रम से दर्शकों को रूबरू कराती है जिसके बारे में उन्हें कुछ खास नहीं पता है।

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राम को इस तरह भी समझिए…

राम मर्यादा पुरुष थे। ऐसा रहना उन्होंने जान-बूझकर और चेतन रूप से चुना था। बेशक नियम और कानून आदेश पालन के लिए एक कसौटी थे। लेकिन यह बाहरी दबाव निरर्थक हो जाता यदि उसके साथ-साथ अंदरूनी प्रेरणा भी न होती।

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अमर सिंह चमकीला फिल्म के बहाने

लोगों की पसंद और मजहब के तथाकथित प्रहरियों के द्वारा तय किये जा रहे मापदंडों के बीच किसी तरह संतुलन बनाते हुए लेकिन अंतत: अपने संगीत में रमे हुए चमकीले की कहानी जानने योग्य और चौंकाने वाली है।

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कला का समाज: तब हम एक-दूसरे के सबसे करीब होते थे!

उसने अंतिम चाकू अपनी पत्नी के सीने को लक्ष्य कर पूरी ताकत से फेंक दिया …वहीं जहां दिल होता है। आंखों से पट्टी हटाकर देखा तो पाया निशाना चूक गया था वह क्या चीज होती है जो एक अभ्यस्त हाथ को अपने लक्ष्य से जरा भी विचलित होने से रोक लेती है।

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लंबा सफर मुश्किल डगर 

एक तबका ऐसा है जो कभी कर्ज डिफॉल्ट नहीं करता। दूसरा हमेशा बैंक का एनपीए (Non performing loan डूबा हुआ कर्ज) बढ़ाता है। हमारी व्यवस्था का बर्ताव आर्थिक लेनदेन की ईमानदारी से नहीं बल्कि सामाजिक स्‍तर से तय होता है। हैसियत देख कर व्‍यवहार करने वाली व्‍यवस्‍था से मिला एक कटु अनभव।

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