यदि यह उम्मीद है तो काश पूरी हो गई हो
उसकी हालत देखकर लग रहा था कि इस वक्त कोई ऐसा होना चाहिए इसके पास जो प्यार से कुछ पूछ भर दे…नरमाहट से हथेलियों को थाम ले… सर पर हाथ फिरा दे…।
यदि यह उम्मीद है तो काश पूरी हो गई हो जारी >
उसकी हालत देखकर लग रहा था कि इस वक्त कोई ऐसा होना चाहिए इसके पास जो प्यार से कुछ पूछ भर दे…नरमाहट से हथेलियों को थाम ले… सर पर हाथ फिरा दे…।
यदि यह उम्मीद है तो काश पूरी हो गई हो जारी >
शुरुआत में यह सोचा भी नहीं था कि एक शहर को खड़ा करने में इतने कलमकारों का हाथ हो सकता है। इस पुस्तक में अपने घर के रचनाकारों पर लिखने की कोशिश में यह भी पता चला कि मेरा शहर तो बहुत सौभाग्यशाली है।
घर के जोगी: मानो वे कह रहे थे, किसी ने हमारी सुध ली नहीं, किसी ने हमें समझा नहीं जारी >
‘मृत्युंजय’, ‘नटसम्राट’ और ‘अंधा युग’ के अश्वत्थामा में आलोक भाई ने अभिनय की उत्कृष्ट मिसाल पेश की। आलोक चटर्जी का जाना देश के रंगमंच से अभिनय के आलोक का स्याह हो जाना है।
पर्दा गिरा… हिंदी रंगमंच के नटसम्राट आलोक चटर्जी विदा जारी >
इस पुस्तक में युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने अपने शहर ‘रतलाम’ के 56 रचनाकारों के कविकर्म से परिचित करवाने का बेहद अहम् कार्य किया है।
घर के जोगी: रतलाम के कवित्त और उसकी विशिष्टता का लेखा जारी >
बचपन में पढ़ी यह कहानी तो आपको याद होगी? कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रख्यात कहानी ‘बूढ़ी काकी’। संपर्क बुनियादी शाला के कक्षा 10 वीं के बच्चों ने वार्षिकोत्सव में इसे मंचित किया।
मंच पर ‘बूढ़ी काकी’: काकी का अधीर मन और इच्छा का प्रबल प्रवाह जारी >
सर्दियां कई तरह के उत्सव की सबब होती हैं। मगर आजकल सर्दियां किसी मुसीबत से कम नहीं। इसका कारण कुछ हमारी लापरवाही और इससे उपजी स्वास्थगत समस्याएं हैं। यदि आपको डायबिटीज है, आपको हाई बीपी या हार्ट व पाचन से जुड़ी कोई समस्या है, आप की उम्र ज्यादा है या बच्चे हैं, सलाह यही है कि ठंड को हल्के में न लीजिए। यह जानलेवा हो सकती है। जितनी जल्दी यह बात समझ ली जाए उतना अच्छा।
यह ठंड है, हल्के में बिल्कुल मत लीजिए, जान ले लेगी… जारी >
क्या हम अपने जीवन की पूरी दिशा बदल सकते हैं? या हम सिर्फ संकीर्ण, घटिया, अर्थहीन जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं? क्या हम यह सब छोड़ सकते हैं और एक साफ स्लेट के साथ नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं?”
आइए, बात करते हैं 2025 के लिए कुछ ऐसे ही संकल्पों की जो एक व्यक्ति, परिवार के सदस्य और सामाजिक रूप से भी हमें बेहतर मनुष्य बना सकें।
नया साल तो आ गया, आपने क्या प्लान किया? जारी >
उम्मीद करें कि नए वर्ष में आप भवानी प्रसाद मिश्र की कविता ‘कुछ लिखकर सो, कुछ पढ़कर सो, जिस जगह सवेरे जागा तू, उससे कुछ आगे बढ़कर सो’ के अंदाज में हर दिन जीते रहें।
2025 में यूं अपने आप तो कुछ भी नहीं बदलेगा जारी >
जुलाई 24 से लेकर अब तक सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपी लोगों की एक बड़ी संख्या को जमानत दी है या उनकी जमानत की पुष्टि की है। इन फैसलों से परिप्रेक्ष्य में बदलाव का स्पष्ट संकेत मिलता है।
यादें 2024: जमानत पर बदला न्याय का तरीका जारी >