सोशल मीडिया के युग में नेरुदा से क्या सीख सकते हैं?
नेरुदा और उनके जैसे ही अन्य लोगों से हम सीख सकते हैं कि खुद को अभिव्यक्त करने का तरीका और सुनना किसी भी प्रतिरोध के मुख्य घटक हैं।
सोशल मीडिया के युग में नेरुदा से क्या सीख सकते हैं? जारी >
नेरुदा और उनके जैसे ही अन्य लोगों से हम सीख सकते हैं कि खुद को अभिव्यक्त करने का तरीका और सुनना किसी भी प्रतिरोध के मुख्य घटक हैं।
सोशल मीडिया के युग में नेरुदा से क्या सीख सकते हैं? जारी >
कीर्ति चक्र विजेता शहीद अंशुमान सिंह के परिजन इस वक्त सुर्खियों में है। उनके माता-पिता ने अपनी बहू स्मृति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहराई से पड़ताल करें तो महसूस होता है कि समस्या केवल आर्थिक नहीं है बल्कि इसकी जड़ें सामाजिक ताने-बाने में उलझी हैं।
दिक्कत आर्थिक नहीं, सामाजिक है; जहां प्रेम आज भी गुनाह है जारी >
हे संसार के पिताओं! अपने असर से बच्चों को जितना दूर रख सकें उतना अच्छा होगा। उन्हें अपने आप ही खिलने दें, अपने संस्कारों का अनावश्यक बोझ उनपर न डालें।
प्यार एक छाता है, छाता एक प्यार है… जारी >
यह देखना-दिखना आखिर है क्या? कभी सोचा है? देखना या दिखाई देना एक तरह से एक आदिम भूख या कह लें प्यास का नाम है, यह आग जैसी तासीर की है।
देखना वह नहीं है जो आप देखते हैं जारी >
हम कबीर चाहे न बन पाएं, लेकिन हमें यह एहसास जरूर हो जाता है कि पूरी तरह डूब जाने से ही हम सुंदरता, संगीत, प्रेम और परम को समझ सकते हैं।
कबीर को जीने वाले लोग … जारी >
संविधान भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की आकांक्षाओं का अंतिम उत्पाद है और उपनिवेशीकरण के नाम पर संविधान की वैधता को नकारना स्वतंत्रता सेनानियों और भारत को स्वतंत्रता दिलाने वाले लोगों के बलिदान को नकारने का प्रयास होता है।
बच गया संविधान? और क्या-क्या बच गया… जारी >
बचपन के किस्से मासूमियत की नर्म शॉल में लिपट कर सालों-साल कुनकुने बने रहते हैं। ऐसे ही ढेरों किस्से हम सबकी संदूक में अवश्य तह बने रखे होंगे तो इन तहों को खोलकर बिखेर लीजिए अपने होंठों की मुस्कान बनाकर।
पुतरिया के सहारे बचपन की नगरी का फेरा जारी >
श्रोता अपने सुनने वाले मन को संपूर्ण रूप से शुरूआती स्तर पर खाली कर लेते हैं, इसमें कलाकार की आलाप लेने वाली प्रक्रिया एक जरिया बनती है। अंत में अगर आनंद स्वरूप श्रोता के अश्रु निकल पड़े तो समझिए वह अपने में डुबकी लगा चुका है,एकात्म घट चुका है।
संगीत सभा के बाद क्यों बजाई जाती हैं तालियां? जारी >
बरगद का वृक्ष कभी-कभी 5000 साल तक जीता है पर वह सिर्फ बरगद का एक वृक्ष ही होता है, उससे ज्यादा कुछ भी नहीं। इसलिए कोई व्यक्ति दीर्घजीवी तो हो सकता है, पर वह एक स्वस्थ पशु भर बना रहेगा।
जिसने योग न किया मानो वह नहीं जिया जारी >
हे संसार के पिताओं! अपने असर से बच्चों को जितना दूर रख सकें उतना अच्छा होगा। उन्हें अपने आप ही खिलने दें, अपने संस्कारों का अनावश्यक बोझ उनपर न डालें।