उदास धूप की टहनी पे रात रख देना…
उदास धूप की शाख़ पर रात रखना ऐसा ही है, जैसे एक मुरझाए हुए पौधे को सूरज की सोहबत में या खुले वातावरण में रख दिया जाए।
उदास धूप की टहनी पे रात रख देना… जारी >
उदास धूप की शाख़ पर रात रखना ऐसा ही है, जैसे एक मुरझाए हुए पौधे को सूरज की सोहबत में या खुले वातावरण में रख दिया जाए।
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किसी राह पर चलने से पहले हर राहगीर यह तय करता है कि उसे कहां पहुंचना है। उसकी निगाहों में उसकी मंज़िल होती है। वह हर पड़ाव को तय करने के बाद मंज़िल की ओर देखता है।
मैं तिरी खोज में तुझ से भी परे जा निकला… जारी >
मणिपुरी भाषा में ‘खोंगचट’ का मतलब होता है ‘यात्रा’ या ‘मोर्चा/रैली’। यह नाटक एक तोते ‘मिजाओ’ की जीवन यात्रा की लोककथा पर बुना गया था। ‘स्वप्नयान’ की यह प्रस्तुति वास्तव में विहान और उसके रंगकर्म की ‘खोंगचट’ है।
विहान की ‘खोंगचट’: परस्परता से दमका रंगकर्म का क्षितिज जारी >
यहां सवाल यह भी कि जिसे दुनियावी इश्क़ ऐसी नौबत तक लाने में नाकाम हो जाए उनका क्या? यहां आ कर यह शेर एक नए ज़ाविए के साथ सामने आता है।
अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझमें… जारी >
इसके भीतर अगर हम जाएं तो एक अर्थ इस शेर से यह भी सामने आता है कि ज़िन्दगी का सफ़र ठीक वैसा ही नहीं है जैसा अमूमन होता है।
वो एक दरिया जो रास्ते में ही रह गया है… जारी >
करीब बीस-पच्चीस मिनिट की चढ़ाई के बाद झरने तक पहुंच गए। बेहद रमणीक स्थान है। मैं तो खड़ा देखता ही रह गया। यहां से हटने का मन ही नहीं कर रहा था।
मैंने अपना पूरा नाम बताया तो वे एकदम उछल पड़े… जारी >
आज तय किया है कि घोसलिया से काफी दूरी पर तीसरा बांध देखने जाएंगे जो इसी साल पूरा हुआ है और जिसमें पहली बार पानी भरा है।
नक्सलवाद के एक काल्पनिक बिजूके को प्रतीक बनाया गया जारी >
झाबुआ जिले में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर काफी समय से चल रहा है। मैं पहले कभी झाबुआ नहीं गया था इसलिए जाने की इच्छा तो है।
दोनों घूम-घूम कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, सावधान रहना जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
भोपाल करीब आने लगा तो मैं ट्रेन में ऊपर चढ़कर बैठ गया… जारी >
अब मैं केवल भविष्य की बातें करता हूं। अतीत की नहीं। एक माह में यह बड़ा परिवर्तन आया प्रतीत हो रहा है। महसूस हो रहा है कि मुझमें अब काफी स्पष्टता आती जा रही है।
जीवन में पहली बार रोजदारी की थी, वह भी भक्ति की! जारी >