life

अंश की यात्रा: एक अनूठे कवि की सांगीतिक दस्तक

आज के समय में एक युवा कवि द्वारा अंतर्मन के गंभीर संकेतों की ये अभिव्यक्तियां चौंकाती हैं और भविष्य के प्रति आश्वस्त भी करती हैं।

अंश की यात्रा: एक अनूठे कवि की सांगीतिक दस्तक जारी >

कॉस्मिक ऑर्केस्ट्रा और मेवाती घराने का संगीत

सितार को समर्पित यशस्वी कला गुरू उस्ताद सिराज खान के मेवाती स्कूल ऑफ सितार के वार्षिक प्रतिष्ठा आयोजन पर हंसध्‍वनि। यह संगीत समारोह ऐसे पवित्र विचार की अनुभूति दे गया,जिसे उपलब्धि ही कहना उचित होगा।

कॉस्मिक ऑर्केस्ट्रा और मेवाती घराने का संगीत जारी >

ताकि संगीत-संस्कृति से हमारा रिश्ता पहले जैसा जरूर हो

‘कुछ दस्तकें, कुछ दस्तख़त’ के केनवस पर उड़ान के पंख की कलम से लिखे गए चमकीले सुवर्ण हर्फ-हर्फ इस तरह महसूस किए जा सकते हैं जैसे ब्रेल लिपि के पाठक करते हैं।

ताकि संगीत-संस्कृति से हमारा रिश्ता पहले जैसा जरूर हो जारी >

जैसे,पास तो होना चाहता है लेकिन जताना नहीं चाहता

बाघ झाड़ी में छिपा होगा। उसकी आँखें चमक रही होगीं। उसकी गंध इसे भी आई होगी। इसने चाहा भी होगा कि टेडी उस ओर न जाए। लेकिन टेडी तो दौड़ पड़ा होगा! और फिर जो हुआ इसने अपनी आँखों से देखा होगा।

जैसे,पास तो होना चाहता है लेकिन जताना नहीं चाहता जारी >

नागनाथ की पेंटिंग्स में सुनिए साइलेंस का म्यूज़िक

नागनाथ जी के चित्र संग्रह देखकर ऑर्गेनिक फीलिंग्स पैदा होती हैं। ये चित्र एक सुघड़ सोच, विश्वास और कॉन्सेप्ट के तहत निर्मित हैं इसीलिए ये वैसा ही असर देखने में पैदा करते है और दर्शक-पाठक को रोककर थाम लेते हैं।

नागनाथ की पेंटिंग्स में सुनिए साइलेंस का म्यूज़िक जारी >

अनुभव में नहीं आती तब तक सवाल ही बनी रहती है जिंदगी

ऊर्जा का मौलिक गुण होता है कि वह स्वतंत्र रहना चाहती है, बंधकर रहना उसे भाता नहीं। मनुष्य के अंदर की बेचैनी दरअसल ऊर्जा के स्वतंत्र होने की इच्छा की तड़प का ही नाम है।

अनुभव में नहीं आती तब तक सवाल ही बनी रहती है जिंदगी जारी >

सत्यजीत रे: स्त्रियों को ऊँचा करने के लिए पुरुषों को कमतर नहीं आँका

सत्यजीत की फिल्मों में स्त्री वस्तु नहीं है, वह सज्जा की सामान भी नहीं है। वहाँ महिलाओं के अधिकारों को बरकरार रखने की जद्दोजहद है लेकिन पुरुषों की कीमत पर नहीं।

सत्यजीत रे: स्त्रियों को ऊँचा करने के लिए पुरुषों को कमतर नहीं आँका जारी >

गुरु के सान्निध्य में रियाज़ की प्रोसेस

संगीत से जुड़े मनुष्य के मनोवैज्ञानिक और व्यवहारगत पक्षों से भी हर कलाकार को परिचित होना चाहिए। आज की भाग-दौड़ भरी जीवनशैली में बढ़ते स्ट्रेस और एंग्जायटी से निपटने के लिए भी लोग संगीत के निकट आ रहे हैं। यह उजला पक्ष भारतीय समाज के जागृत विवेक का स्वत: परिचायक है।

गुरु के सान्निध्य में रियाज़ की प्रोसेस जारी >

हे मेरे मरण, आ और मुझसे बात कर

अहा! उसकी वे स्नेह भरी आँखें! आँखे भर क्यों? चेहरा, देह, देह का रोम-रोम जिस स्नेह से, जिस प्रेम से भरा है। खासकर तब, जब वह अपनी बेटी को गले लगा रहा है! पीछे ही वह दूत प्रतीक्षा में है जिसके साथ उसे उस पार चले जाना है।

हे मेरे मरण, आ और मुझसे बात कर जारी >