अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय
इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी का समाधि-लेख लिख दिया, वे राजनीति को स्थिर चित्र की तरह पढ़ रहे हैं।
अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय जारी >
इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी का समाधि-लेख लिख दिया, वे राजनीति को स्थिर चित्र की तरह पढ़ रहे हैं।
अभी नहीं आया तृणमूल कांग्रेस का समाधि लेख लिखने का समय जारी >
सच्चा ज्ञान प्रकाश है और नीरव एकांत के बीहड़ में,अंधेरे में प्रकाश का स्पार्क खुरदुरे चकमक पत्थर की रगड़ से पैदा होता है। यहां खुरदुरेपन को दु:ख, असीम दुःख समझें।
ज्ञान भी ज्ञानियों का पीछा करता है,उन्हें संरक्षण भी देता है… जारी >
मुझे उनकी बात कुछ जम नहीं रही है। मैं काफी विचलित हो गया। ऐसा क्यों किया गया है? क्या महेश जी की खुद की यह सोच और निर्णय था या उन पर दबाव डालकर थोपा गया?
मैं विचलित हूं, मुझे बताए बिना महेश जी ने ऐसा क्यों किया? जारी >
लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।
खबर फैल गई कि मैं ‘बैरागी’ हूं, इनाम नहीं मिलेगा जारी >
इन आदिवासियों की नैसर्गिक प्रतिभा और सौंदर्य दृष्टि को लेकर मैं जरूर सम्मोहित हो रहा था। स्पष्ट कहूं तो सम्मोहित हो गया था।
सौ दिन पूरे… लगता है घर से बहुत दूर न जाकर गलती कर दी जारी >
मैं नैतिक और अनैतिक की दुविधा से गुजर रहा था। मगर यहां का आदिवासी समुदाय इसे जिस सहजता से स्वीकार और अंगीकार कर रहा है, वह वास्तव में शोध का विषय हो सकता है।
घर बनते जाते हैं, जमीन बंटती चली जाती है लेकिन रहते सब साथ-साथ हैं जारी >
वैसे देखा जाए तो पिछले लगभग दो महीने में, जब से मैं सम्पर्क में हूं, शिवगंगा ने कांवड़ यात्रा और गणेश उत्सव आयोजन में ही सारी शक्ति झोंक रखी है।
मैं संघ का भेदिया हूं, वकील तो ऐसे होते नहीं हैं… जारी >
सोचता हूं पिता का न रहना, हमें एकाएक वयस्क से प्रौढ़ बना देता है। उनके रहते हम हमेशा निर्णय लेने की प्रक्रिया में बहुत सक्रिय नहीं रहते।
अहसास हुआ कि लोग सफर को मंजिल से बेहतर क्यों बताते हैं… जारी >
बस, वृंदावन की गलियां में चलते चले गए। वृंदावन की गलियों का जिक्र तो कई गानों, भजनों में है, लेकिन प्रत्यक्ष देखने का मौका अभी मिला। वह अनदेखा जैसे अब साकार हो रहा है।
वृंदावन की कुंज गली में बदल गया मेरा नजरिया जारी >
लो तो अब हम पिताजी भी हो गए इस बतीस साल के लड़के की मां और छह साल की पोती की दादी के पिताजी! अब यहां से दण्ड-कमण्डल समेटने का समय आ गया है।
कथा वाचक की नई भूमिका, मुझे अंदर से हँसी आ रही थी… जारी >