भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा…
लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।
भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा… जारी >


