diwali

भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा…

लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।

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खबर फैल गई कि मैं ‘बैरागी’ हूं, इनाम नहीं मिलेगा

लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।

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अपने गांव भंवरताल में हूं; एक वो दिवाली थी, एक ये दिवाली है, एकदम अलग

सब कुछ छोड़ देने की संकल्पना के बावजूद ऐसा बहुत कुछ हम सबके पास होता है, जो कभी भी छूटता नहीं। शायद यही अपनापन और जुड़ाव हमें हमेशा जीवंत भी बनाए रखता है।

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