अहसास हुआ कि लोग सफर को मंजिल से बेहतर क्यों बताते हैं…
सोचता हूं पिता का न रहना, हमें एकाएक वयस्क से प्रौढ़ बना देता है। उनके रहते हम हमेशा निर्णय लेने की प्रक्रिया में बहुत सक्रिय नहीं रहते।
अहसास हुआ कि लोग सफर को मंजिल से बेहतर क्यों बताते हैं… जारी >










