दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा…
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा- जीवन से बड़ी कोई किताब नहीं, मगर इसे अपनी रोशन नजर से पढ़ना…
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा… जारी >
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा- जीवन से बड़ी कोई किताब नहीं, मगर इसे अपनी रोशन नजर से पढ़ना…
दुनियादारी सिखाते हुए पापा ने कहा… जारी >
चारों एपिसोड एक अपराध से जुड़े अलग अलग आयामों पर केंद्रित हैं जिनमें इंवेस्टिगेशन के दौरान कुछ बेहद भावुक और सुकूनदायक सीन आते हैं जो शीतल हवा के झोंकों सा अहसास देते हैं।
किशोरों के माता-पिता के लिए जरूर देखने वाली सीरीज जारी >
पारिवारिक रिश्तों के इतर हमारे आस-पास इतने प्यारे रिश्ते होते हैं और वे जीवन के नाजुक मोड़ पर कैसे आपको संभाल सकते हैं यह देखना सुखद है।
चीजों को होने देने के इंतजार का धैर्य और उन पर खामोश नजर जारी >
बाघ झाड़ी में छिपा होगा। उसकी आँखें चमक रही होगीं। उसकी गंध इसे भी आई होगी। इसने चाहा भी होगा कि टेडी उस ओर न जाए। लेकिन टेडी तो दौड़ पड़ा होगा! और फिर जो हुआ इसने अपनी आँखों से देखा होगा।
जैसे,पास तो होना चाहता है लेकिन जताना नहीं चाहता जारी >
नागनाथ जी के चित्र संग्रह देखकर ऑर्गेनिक फीलिंग्स पैदा होती हैं। ये चित्र एक सुघड़ सोच, विश्वास और कॉन्सेप्ट के तहत निर्मित हैं इसीलिए ये वैसा ही असर देखने में पैदा करते है और दर्शक-पाठक को रोककर थाम लेते हैं।
नागनाथ की पेंटिंग्स में सुनिए साइलेंस का म्यूज़िक जारी >
ऊर्जा का मौलिक गुण होता है कि वह स्वतंत्र रहना चाहती है, बंधकर रहना उसे भाता नहीं। मनुष्य के अंदर की बेचैनी दरअसल ऊर्जा के स्वतंत्र होने की इच्छा की तड़प का ही नाम है।
अनुभव में नहीं आती तब तक सवाल ही बनी रहती है जिंदगी जारी >
सत्यजीत की फिल्मों में स्त्री वस्तु नहीं है, वह सज्जा की सामान भी नहीं है। वहाँ महिलाओं के अधिकारों को बरकरार रखने की जद्दोजहद है लेकिन पुरुषों की कीमत पर नहीं।
सत्यजीत रे: स्त्रियों को ऊँचा करने के लिए पुरुषों को कमतर नहीं आँका जारी >
संगीत से जुड़े मनुष्य के मनोवैज्ञानिक और व्यवहारगत पक्षों से भी हर कलाकार को परिचित होना चाहिए। आज की भाग-दौड़ भरी जीवनशैली में बढ़ते स्ट्रेस और एंग्जायटी से निपटने के लिए भी लोग संगीत के निकट आ रहे हैं। यह उजला पक्ष भारतीय समाज के जागृत विवेक का स्वत: परिचायक है।
गुरु के सान्निध्य में रियाज़ की प्रोसेस जारी >
अहा! उसकी वे स्नेह भरी आँखें! आँखे भर क्यों? चेहरा, देह, देह का रोम-रोम जिस स्नेह से, जिस प्रेम से भरा है। खासकर तब, जब वह अपनी बेटी को गले लगा रहा है! पीछे ही वह दूत प्रतीक्षा में है जिसके साथ उसे उस पार चले जाना है।
हे मेरे मरण, आ और मुझसे बात कर जारी >
आज हम बात कर रहे हैं ऑर्गेनिक संवाद को बनाए रखने के लिए गठित प्रोफेशनल्स के समूह संवाद और संपर्क की। इस ग्रुप में के सदस्य बंद दरवाज़ों के लोग नहीं हैं बल्कि ये सब फ्रेश हवा की दुनिया के लोग हैं।
काम में आनंद ढूंढना और आनंद से काम करना, जिनका जीवन दर्शन जारी >