Emergency: इसे कंगना की फिल्म समझकर जज मत कीजिए…
यह अंततः एक बायोपिक है जिसे देख कर आप उसकी प्रमुख पात्र से सहानुभूति अधिक और निंदा कम के भाव से बाहर आते हैं।
Emergency: इसे कंगना की फिल्म समझकर जज मत कीजिए… जारी >
यह अंततः एक बायोपिक है जिसे देख कर आप उसकी प्रमुख पात्र से सहानुभूति अधिक और निंदा कम के भाव से बाहर आते हैं।
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हाइपोथैलेमस हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यह हमारे मस्तिष्क का एक छोटा सा हिस्सा है, जो तंत्रिका तंत्र और हार्मोन के बीच संचार बनाए रखता है। शरीर की धड़कन, तापमान, भूख-प्यास, हमारा मूड सब यहीं से तय होता है।
कड़ाके की सर्दी में भी हाफ टी शर्ट, आखिर क्यों नहीं लगती है इन्हें ठंड? जारी >
जिनकी प्रेम की निगाहें होतीं हैं वे बहुत दूर तक देखते हैं तारों को पढ़ते रहते हैं। जैसे प्रेम का सूत संकेतों की भाषा में काता जाता है, फिर प्रेम संबंध की गुंथी हुई डोर बनती है, आप किसी से आबद्ध होते हैं, उसी तरह प्रकृति भी आपकी प्रेयसी है।
स्मरण कुमार गंधर्व: अजुनी रुसून आहे, खुलतां कळी खुले ना जारी >
यह किताब इसलिए पढ़ी जानी चाहिए कि यह लेखक की आत्मकथा नहीं उस शहर भोपाल की आत्मकथा है जिसने अपने बाशिंदों को बदहवास सड़कों पर दौड़ते देखा है, जो आज भी उन्हें दम तोड़ते देख रहा है।
‘कठघरे में साँसें’: क्यों पढ़ें यह किताब? जारी >
उसकी हालत देखकर लग रहा था कि इस वक्त कोई ऐसा होना चाहिए इसके पास जो प्यार से कुछ पूछ भर दे…नरमाहट से हथेलियों को थाम ले… सर पर हाथ फिरा दे…।
यदि यह उम्मीद है तो काश पूरी हो गई हो जारी >
शुरुआत में यह सोचा भी नहीं था कि एक शहर को खड़ा करने में इतने कलमकारों का हाथ हो सकता है। इस पुस्तक में अपने घर के रचनाकारों पर लिखने की कोशिश में यह भी पता चला कि मेरा शहर तो बहुत सौभाग्यशाली है।
घर के जोगी: मानो वे कह रहे थे, किसी ने हमारी सुध ली नहीं, किसी ने हमें समझा नहीं जारी >
‘मृत्युंजय’, ‘नटसम्राट’ और ‘अंधा युग’ के अश्वत्थामा में आलोक भाई ने अभिनय की उत्कृष्ट मिसाल पेश की। आलोक चटर्जी का जाना देश के रंगमंच से अभिनय के आलोक का स्याह हो जाना है।
पर्दा गिरा… हिंदी रंगमंच के नटसम्राट आलोक चटर्जी विदा जारी >
इस पुस्तक में युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने अपने शहर ‘रतलाम’ के 56 रचनाकारों के कविकर्म से परिचित करवाने का बेहद अहम् कार्य किया है।
घर के जोगी: रतलाम के कवित्त और उसकी विशिष्टता का लेखा जारी >
बचपन में पढ़ी यह कहानी तो आपको याद होगी? कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रख्यात कहानी ‘बूढ़ी काकी’। संपर्क बुनियादी शाला के कक्षा 10 वीं के बच्चों ने वार्षिकोत्सव में इसे मंचित किया।
मंच पर ‘बूढ़ी काकी’: काकी का अधीर मन और इच्छा का प्रबल प्रवाह जारी >
सर्दियां कई तरह के उत्सव की सबब होती हैं। मगर आजकल सर्दियां किसी मुसीबत से कम नहीं। इसका कारण कुछ हमारी लापरवाही और इससे उपजी स्वास्थगत समस्याएं हैं। यदि आपको डायबिटीज है, आपको हाई बीपी या हार्ट व पाचन से जुड़ी कोई समस्या है, आप की उम्र ज्यादा है या बच्चे हैं, सलाह यही है कि ठंड को हल्के में न लीजिए। यह जानलेवा हो सकती है। जितनी जल्दी यह बात समझ ली जाए उतना अच्छा।
यह ठंड है, हल्के में बिल्कुल मत लीजिए, जान ले लेगी… जारी >