सुना है कि मंज़िल क़रीब आ गई है…
मंज़िल का मिलना उतना ख़ास नहीं है जितना ख़ास रास्तों की तकलीफ़ों का सामना करना और समझना।
सुना है कि मंज़िल क़रीब आ गई है… जारी >
मंज़िल का मिलना उतना ख़ास नहीं है जितना ख़ास रास्तों की तकलीफ़ों का सामना करना और समझना।
सुना है कि मंज़िल क़रीब आ गई है… जारी >
प्रख्यात जनवादी कथाकार-आलोचक नीलकांत का 14 जून 2025 की सुबह 90 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे उस पीढ़ी के कथाकार और आलोचक थे जिनके लिए विचारधारा के विशेष मायने थे।
नीलकांत जी एक व्यक्ति नहीं, एक सतत विचार थे जारी >
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को भयभीत करने से आरोपी भारतीय दंड संहिता की धारा 387 के तहत अपराध का दोषी हो जाएगा; इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 383 के तहत जबरन वसूली के सभी तत्वों को पूरा करना आवश्यक नहीं है।
किसी व्यक्ति को डराना आईपीसी की धारा 387 के तहत अपराध जारी >
कहने को यह हास्य नाटक था पर अपनी प्रस्तुति में ऐसी शिक्षाएँ और संकेत लिए था जिससे जनसमाज सचेत हो सके।
हास्य चूड़ामणि: हमारी उम्मीदों से भी कई कदम आगे विहान जारी >
आज विश्व पर्यावरण दिवस है। संयुक्त राष्ट्र ने तीन पर्यावरणीय मुद्दों को समूचे विश्व के लिए चिंता का विषय बताया है। “ट्रिपल प्लेनेटरी क्राइसिस” यानी जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता की हानि हम सबके फिक्र का केंद्र होना चाहिए। जहां बाहरी पर्यावरणीय अंसतुलन हमारे भीतर असर डाल रहा है वैसे ही हमारे मन का पर्यावरणीय असंतुलन हमारे पूरे जीवन को प्रभावित कर रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर मन के पर्यावरण की सुध लेने को सचेत करता हुआ यह आलेख।
ओवरथिंकिंग से आजादी: मन के पर्यावरण की फिक्र कितनी? जारी >
साइकिल पर चलता इंसान जीवन और अपनी खुद की गति के बीच एक अद्भुत ताल-मेल बैठा लेता है, और उनके बीच के संबंधों का संतुलन शायद ही कभी बिगड़ता होI साइकिल सवार पैदल लोगों की तुलना में तीन या चार गुना ज्यादा तेज चल लेता है।
साइकिल की अपनी एक तहजीब होती है जारी >
एक मां ने अपनी बेटियों की हत्या की और अदृश्य प्रभाव का दावा किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सजा कम की, मानसिक अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए, लेकिन यह विवादास्पद और जटिल है।
क्या अदृश्य शक्ति के प्रभाव में कोई अपने बच्चों की हत्या कर सकता है! जारी >
जेन एआई अर्थात् जनरेटिव एआई को एक सभ्यतागत परिवर्तन के हेतु के रूप में देखना सचमुच सिर्फ एक कॉरपोरेट आकलन नहीं है।
हम एआई से डरते हैं क्योंकि वह मुनष्य न हो कर भी निर्णय ले सकता है… जारी >
नागनाथ जी के चित्र संग्रह देखकर ऑर्गेनिक फीलिंग्स पैदा होती हैं। ये चित्र एक सुघड़ सोच, विश्वास और कॉन्सेप्ट के तहत निर्मित हैं इसीलिए ये वैसा ही असर देखने में पैदा करते है और दर्शक-पाठक को रोककर थाम लेते हैं।
नागनाथ की पेंटिंग्स में सुनिए साइलेंस का म्यूज़िक जारी >
ऊर्जा का मौलिक गुण होता है कि वह स्वतंत्र रहना चाहती है, बंधकर रहना उसे भाता नहीं। मनुष्य के अंदर की बेचैनी दरअसल ऊर्जा के स्वतंत्र होने की इच्छा की तड़प का ही नाम है।
अनुभव में नहीं आती तब तक सवाल ही बनी रहती है जिंदगी जारी >